शनि शिंगणापुर : खुले आसमान के नीचे विराजित हैं शनि देवता



देश में सूर्यपुत्र शनिदेव के कई मंदिर हैं लेकिन उनमें सर्वाधिक प्रमुख है के जिले में स्थित शिंगणापुर का शनि मंदिर। विश्वप्रसिद्ध इस की विशेषता यह है कि यहां स्थित शनिदेव की प्रतिमा बगैर किसी छत्र या गुंबद के खुले आसमान के नीचे एक संगमरमर के चबूतरे पर विराजित है।
शिंगणापुर के इस शनि मंदिर में लोहा एवं पत्थरयुक्त दिखाई देने वाली काले वर्ण की शनिदेव की प्रतिमा लगभग 5 फीट 9 इंच लंबी और 1 फीट 6 इंच चौड़ी है, जो धूप, ठंड तथा बरसात में दिन-रात खुले में
ही स्थित है।

के बारे में यह प्रचलित है कि यहां देवता हैं, लेकिन मंदिर नहीं। घर है,लेकिन दरवाजा नहीं। वृक्ष है, पर छाया नहीं। भय है, पर शत्रु नहीं।
श्री शिंगणापुर की ख्याति इतनी अधिक है कि आज यहां प्रतिदिन 13,000 से ज्यादा लोग दर्शन करने आते हैं और शनि अमावस, शनि जयंती को लगने वाले मेले में करीब10 लाख लोग आते हैं। शिंगणापुर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां घरों में दरवाजे नहीं होते।


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