इन 10 में से आप कौन से कर्ज से ग्रस्त हैं, जानिए

को कहते हैं। परंपरागत ज्योतिष से थोड़ी भिन्न विद्या है लाल किताब। लाल किताब में अधिकतर उपाय अनुभूत सत्य पर आधारित है। प्राचीनकाल में यह विद्या उत्तराखंड और हिमालयीन राज्यों में ही प्रचलित थी। आजकल उसका प्रचलन बढ़ गया है।
आपकी कुंडली के सभी ग्रह अच्छे हैं, लेकिन आपके कर्म खराब हैं तो कुंडली के ग्रह भी खराब होते जाएंगे और तब यह माना जाएगा कि आपके जन्म के समय को कुंडली बनी थीं वह अब पूर्णत: बदल गई है। इसी तरह ग्रहों और आपके कर्मों की चाल के अनुसार कुंडली बदलती रहती है। इस बदलते क्रम में व्यक्ति जन्म काल में जिस ऋण से ग्रस्त नहीं था वह भी उस ऋण से ग्रस्त हो जाता है।
 
हिन्दू शास्त्रों में तीन ऋणों की चर्चा मिलती है। 1. देव ऋण, 2. ऋषि ऋण और 3. पितृ ऋण। लेकिन लाल किताब की कुंडली अनुसार 14-15 तरह के ऋण होते हैं जिनमें से किसी एक या दो ऋण से व्यक्ति परेशान रहता है। प्रमुख रूप से यहां 10 ऋण प्रस्तुत है। इन ऋणों को चुकाने के बाद व्यक्ति जिंदगी भर सुखी रह सकता है। आइये जानते हैं कि वे कौन से ऋण हैं।
 
अगले पन्ने पर पहला ऋण...


और भी पढ़ें :