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ये लक्षण दिखाई दें तो समझें आप कालसर्प योग से पीड़ित हैं...


 
 
*  से पीड़ित जातक के ये हैं 5  
 
जब किसी भी जातक की जन्मपत्रिका में राहु और केतु के बीच शेष सातों ग्रह आ जाते हैं, तो ऐसी पत्रिका कालसर्प से पीड़‍ित‍ होती है। जिस जातक की पत्रिका में होता है उसका जीवन अत्यंत कष्टदायक एवं दुखी होता है। ये जातक मन ही मन घुटते है, कुंठा से भर जाते है।

आइए जानते हैं कालसर्प योग के अन्य लक्षण क्या है - 
 
1. आर्थिक तंगी (धन की कमी), चिड़चिड़ापन, बेवजह तनाव, मायूसी, उदासी, चिंता, हीनभावना, आत्महत्या के विचार आना, घर में कलह इत्यादि। 
 
2. एक ही विचार बार-बार आना, कार्य में विरोध उत्पन्न होना, व्यापार में हानि की संभावना हमेशा बनी रहना, किसी कार्य में मन नहीं लगना। 
 
3. पेट की खराबी, पेट दर्द, नशे की आदत पड़ जाना, नींद न आना, मिर्गी रोग, सिरदर्द, माइग्रेन, हिस्टीरिया, संशय, क्रोध, भूख न लगना, रोगों से हमेशा पीड़‍ित‍ रहना, क्षणिक उ‍त्तेजना, गुमसुम बने रहना ये सभी प्रकार के लक्षण अर्थात् अनेक प्रकार की परेशानी का कारण कालसर्प योग एवं राहु-केतु हैं। 
 
4.  एकाग्रता व आत्मविश्वास में कमी, बच्चों की चिंता, विवाह में देरी होना, बच्चों का असफल होना, पढ़ाई में मन नहीं लगना। 
 
5.  पति-पत्नी में कलह, पुरुषार्थ में कमी, नपुंसकता, जमीन संबंधी व्यवधान, मुकदमें आदि से परेशान, बेवजह समय बर्बाद होना, जीवन की गति में कमी आना, पूजा-पाठ में मन नहीं लग‍ना। अत: कालसर्प की शांति कराना आ‍वश्यक होता है। 


 
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