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गणेश जी और उनकी प्रिय दूर्वा, पढ़ें 10 विशेष बातें



गणेशजी को तुलसी छोड़कर सभी पत्र-पुष्प प्रिय हैं... गणपतिजी को दूर्वा अधिक प्रिय है। अतः सफेद या हरी दूर्वा चढ़ानी चाहिए। 
 
1. दूः+अवम्‌, इन शब्दों से दूर्वा शब्द बना है।  'दूः' यानी दूरस्थ व 'अवम्‌' यानी वह जो पास लाता है। 
 
2. दूर्वा वह है, जो गणेश के दूरस्थ पवित्रकों को पास लाती है। 
 
3. गणपति को अर्पित की जाने वाली दूर्वा कोमल होनी चाहिए। ऐसी दूर्वा को बालतृणम्‌ कहते हैं। सूख जाने पर यह आम घास जैसी हो जाती है। 
 
4. दूर्वा की पत्तियां विषम संख्या में (जैसे 3, 5, 7) अर्पित करनी चाहिए। 
 
5 .पूर्वकाल में गणपति की मूर्ति की ऊंचाई लगभग एक मीटर होती थी, इसलिए समिधा की लंबाई जितनी लंबी दूर्वा अर्पण करते थे। मूर्ति यदि समिधा जितनी लंबी हो, तो लघु आकार की दूर्वा अर्पण करें, परंतु मूर्ति बहुत बड़ी हो, तो समिधा के आकार की ही दूर्वा चढ़ाएं। 
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