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जल्दी बुझेगी मूँदीवासियों की प्यास

खंडवा | Naidunia| पुनः संशोधित बुधवार, 7 सितम्बर 2011 (20:58 IST)
पुनासा उद्वहन परियोजना के माध्यम से मूँदी नगर की पेयजल समस्या के स्थायी हल निकाले जाने की कवायदें अब तेज हो गई हैं। इसे लेकर नगर पंचायत प्रशासन एवं नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (नघाविप्रा) के उच्चाधिकारियों की बैठकें जारी हैं। जिसमें इस योजना को अंतिम रूप दिए जाने का कार्य लगभग पूर्णता की ओर है।

नगर की पेयजल समस्या के स्थायी निराकरण के लिए नर्मदा के पानी को उद्वहन सिंचाई के लिए निर्मित अतिशेष जलाशय क्रमांक दो केनूद से बड़ी क्षमता की पाइप लाइन डालकर मूँदी लाया जाना प्रस्तावित है। सिंचाई के अलावा इस जलाशय में नघाविप्रा पानी की मात्रा सदैव इतनी रखेगा जिससे हर समय नगर को पेयजल मिलता रहे।

प्रस्ताव भेजा

इधर नगर पंचायत ने नघाविप्रा संभाग 18 को पत्र लिखकर योजना संदर्भित जानकारी के साथ अपना प्रस्ताव भेज दिया है। बताया जाता है कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार तकरीबन 1 करोड़ 7 लाख की निधि सम्पवेल, फिल्टर निर्माण, विद्युत मोटरें आदि में लगाए जाने का प्रावधान है। योजना को बनाए जाने एवं तकनीकी स्वीकृति के लिए उपसंचालक इंदौर एवं कार्यपालन यंत्री नगरीय प्रशासन को प्रकरण भेजा जा रहा है।

उद्वहन परियोजना भी प्रगति पर

पुनासा उद्वहन के द्वितीय चरण में जहाँ केनूद जलाशय का कार्य पूर्णता की ओर है वहीं परियोजना के पिपलकोटा के पास स्थित स्वीचयार्ड (पंपिंग हाउस) भी पूर्णता की ओर है। यहाँ विद्युत कनेक्शन किए जाने का कार्य प्रगति पर है। इस पंपिंग स्थल की मोटरों से भादलीखेड़ा जलाशय से पानी को केनूद जलाशय तक पहुँचाया जाएगा। निर्माण कंपनी आईआरवीसीएल के सूत्रों के अनुसार एक-दो दिनों में कंपनी स्तर पर इस पंपिंग स्टेशन का परीक्षण किया जाना है।

10 सितंबर को हो सकता है परीक्षण

नघाविप्रा के अनुसार विभागीय तौर पर इस प्रक्रिया का परीक्षण 10 सितंबर को हो सकता है। विभागीय तकनीशियन इस परीक्षण के साथ यह देखेंगे की पंपिंग स्थल तक पानी पहुँचने के साथ पानी को केनूद जलाशय तक सरलता से पहुँचाया जा सकता है या नहीं। पिपलकोटा स्थित पंपिंग स्टेशन से केनूद जलाशय तक पानी पहुँचाने के लिए ऊँचाई तक लिफ्ट किया जाना है। ऐसे में पाइप लाइनों की क्षमता को आँका जाना भी सुनिश्चित किया गया है। इसकी सफलता से मूँदी नगर की पेयजल समस्या की निजात के साथ उद्वहन परियोजना से तीसरे चरण के गाँवों तक पानी ले जाना आसान होगा।


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