नरेन्द्र मोदी ही अकेले 'राक्षस' क्यों..?

मधु किश्वर|
फरवरी 2002 में जब हिंसक दंगों से गुजरात के कुछ हिस्से कांप उठे, तब मैंने भी राष्ट्रीय मीडिया और अपने सक्रिय प्रतिभागी मित्रों के विवरण को स्वीकार कर लिया और मान लिया कि वर्ष 2002 के दंगों में मोदी भी लिप्त थे। इस कारण से मैंने भी मोदी के खिलाफ बयानों पर हस्ताक्षर कर दिए और मानुषी में उन लेखों को छापा, जिनमें गुजरात सरकार को दोषी ठहराया गया था। हमने भी दंगा पीडि़तों के लिए फंड इकट्‍ठा किया।
 
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लेकिन, मैं अपने नाम से कुछ भी लिखने से बचती रही क्योंकि मुझे गुजरात जाने, वहां अनुभव लेने और स्वयं स्थिति को जांचने का मौका नहीं मिला था। मेरे पहले के विभिन्न दंगों को कवर करने के अनुभव और कश्मीर तथा पंजाब में हिंसक संघर्ष की स्थितियों ने मुझे सिखा दिया था कि ऐसे मुद्‍दों पर सुनिश्चित रुख तय करने से पहले मीडिया की रिपोर्टों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है क्योंकि ये आमतौर पर लेखक की विचारधारा के रंग से रंगी होती हैं। इसलिए मैंने गुजरात पर कोई बयान देने से खुद को रोका।> > देश के सभी बड़े दंगों को कवर करने के लिए- जिनमें 1984 का सिखों का नरसंहार शामिल है, 1980 के दशक में मेरठ और मलियाना में दंगों के दौर, 1993 के बॉम्बे के दंगे, 1989 में जम्मू के दंगे और कई अन्य बहुत से दंगों, जोकि बिहारशरीफ, भिवंडी, जमशेदपुर और अहमदाबाद तथा सूरत में हुए थे, के दौर का बारीकी से अध्ययन करने में बहुत-सा समय खर्च करने के बाद मैंने जाना कि दिल्ली में 1984 के दंगों को छोड़कर अन्य सभी दंगे भाजपा और कांग्रेस ने मिल-जुलकर भड़काए थे।
गुजरात दंगे में कांग्रेसी भी शामिल थे : बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जो साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ था, इस अपराध में भाजपा के साथ कांग्रेस भी बराबर की भागीदार थी। महात्मा गांधी के वैचारिक आदर्शवाद से कभी प्रेरित रही कांग्रेस पार्टी इससे पूरी तरह दूर होकर और अपनी संदिग्ध भूमिका के कारण सारे देश में हाशिए पर आ गई है।

जानकार गुजरातियों का कहना था कि 2002 के दंगों में संघ परिवार के उपद्रवियों के साथ कांग्रेसी भी शामिल थे, जिन्होंने सामूहिक हत्याओं, आगजनी और लूट में बड़े उत्साह से भाग लिया था।

दंगों में हिन्दुओं की क्या स्थिति थी : शुरुआती रिपोर्टों से यह जानकारी मिली और बाद में अनौपचारिक नेटववर्क्स से पता चला कि मुस्लिमों की ओर से भी बदले में भारी हिंसा की गई, जिसके चलते हजारों हिंदुओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा और उन्हें भी शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी।

इसलिए जब आमतौर पर भाजपा और विशेष रूप से मोदी को हमलों के लिए एक मात्र जिम्मेदार बताया गया और अब तक के ज्ञात इतिहास में इन दंगों से पहले और बाद में अन्य किसी राजनीतिज्ञ का इतना राक्षसीकरण नहीं किया गया। तब इस कारण से किसी में भी इतनी घृणा और मोदी हटाओ प्रचार से स्वाभाविक तौर पर बेचैनी पैदा हुई।

यह बेचैनी तब और बढ़ गई जब वर्षों के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि मोदी को राक्षस बताने और बनाने में शामिल एनजीओ, सक्रिय प्रतिभागियों, पत्रकारों, शिक्षाविदों को कांग्रेस पार्टी का सक्रिय संरक्षण मिला और कुछ को तो मोदी के खिलाफ लगातार अभियान चलाने के लिए बहुत अधिक वित्तीय सहायता भी मिली।

 

क्यों नहीं बने राजीव गांधी और राव राक्षस......



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