महिला आरक्षण कानून पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की लगाएगा चुनावी नैय्या पार?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के जीत के चौके को रोकने के लिए भाजपा ने इस बार अपनी रणनीति बदली है। भाजपा महिला कार्ड के सहारे बंगाल में अपनी चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश में जुटी दिखाई दे रही है। इसके लिए एक और जहां भाजपा अपने चुनावी कैंपेन को महिलाओं के इर्द-गिर्द फोकस रखकर इससे जुडे वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट कर रही है तो दूसरी ओर मोदी सरकार महिला आऱक्षण कानून के जरिए भी सीधे महिलाओं को सीधा संदेश देने की कोशिश में है।
सोमवार को अमम के बरपेटा में चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहा कि महिला आरक्षण बिल का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र में इसे पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा हमने सभी राजनीतिक दलों से इस पर चर्चा की है और उनसे अनुरोध किया है कि वे देश की बहनों और बेटियों के अधिकारों से जुड़े इस काम को सर्वसम्मति से आगे बढ़ाएं। किसी भी राज्य को इससे नुकसान नहीं होगा, चाहे वह पूर्वोत्तर हो या दक्षिण भारत। महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें देने की व्यवस्था की जा रही है।
चुनाव से पहले महिला आऱक्षण का ट्रंप कार्ड- बंगाल में विधानसभा चुनाव की वोटिंग से ठीक पहले 16 से 18 अप्रैल के बीच में सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) में बदलाव करने से जुड़े संशोधन लाने जा रही है। सरकार नारी शक्ति वंदन एक्ट में बदलाव के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने के साथ परिसीमन एक्ट में संशोधन का विधयेक लाने जा रही है। इन दोनों विधयकों को लाने का उद्देश्य महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से पहले लागू करना है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि हम 16 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण विधेयक ला रहे हैं। इसे किसी राजनीतिक पहल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। महिला आरक्षण बिल में कुछ संशोधन किए जाने हैं और इसे 2029 से लागू करने का इरादा है।
वहीं कांग्रेस ने इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने और चुनावी फायदे के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया है। कांग्रेस ने इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया है।
गौरतलब है कि महिला आरक्षण कानून पहले ही संसद से पारित हो चुका है, लेकिन इसके लागू होने की शर्त नई जनगणना और परिसीमन से जुड़ी हुई थी। मौजूदा महिला आरक्षण कानून में संसद तथा राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें सन 2034 से आरक्षित करने की बात कही गई है। अब सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण को लागू करने के लिए इसमें अहम बदलाव करने की तैयारी में है। अगर संसद में मौजूदा बजट सत्र में यह दोनों अहम विधयेक पास हो जाते है तो अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण कानून लागू हो सकता है।
बढ़ जाएगी लोकसभा में सीटों की संख्या-महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने की तैयारी है। इसको लिए लोकसभा की वर्तमान सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है, जिसमें 33 फीसदी यानि 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती है। महिला आरक्षण की नई व्यवस्था को 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करने की योजना पर विचार चल रहा है। नए प्रवाधान में बड़े राज्यों में 33 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से लोकसभा सीटें बढ़ाई जाएंगी।
राज्यों की विधानसभाओं में महिला आरक्षण कानून को लागू करने की प्रक्रिया भी केंद्र के समान ही होगी। प्रत्येक राज्य की विधानसभा में कुल सीटों की 33 फीसदी यानि एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसमें एससी और एसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी उसी कोटे के भीतर आरक्षण का प्रावधान है यानी एससी और एसटी के लिए आरक्षित सीटों में से भी एक-तिहाई सीटें उस वर्ग की महिलाओं के लिए होंगी।
गौरतलब है कि 2002 में 84वें संविधान संशोधन के कारण लोकसभाऔर विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर 2026 तक रोक लगी हुई है और इस रोक को संविधान संशोधन के ज़रिए ही हटाया जा सकता है, इसलिए सरकार महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव, दोनों पर काम कर रही है।
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