पश्चिम बंगाल में वोटिंग से पहले I-PAC पर ED का शिकंजा, BJP के सामने कमजोर पड़ेगी ममता की अंतिम दौर की लड़ाई ?
बंगाल में ममता बनर्जी की हैट्रिक लगाने में अब BJP के साथ ED बड़ी चुनौती?
बंगाल विधानसभा चुनाव में पहले चरण की वोटिंग (23 अप्रैल) के लिए आज शाम चुनाव प्रचार खत्म हो रहा है, वहीं दूसरे चरण की वोटिंग (29 अप्रैल) के लिए अब अंतिम दौर का चुनावी प्रचार जोरों पर है। बंगाल विधानसभा चुनाव जहां एक ओर भाजपा और टीएमसी के बीच जुबानी जंग जारी है। वहीं एक सियासी लड़ाई चुनावी मैंनेजमेंट के तौर पर छिड़ी हुई दिखाई दे रही है। बंगाल में वोटिंग से ठीक पहले ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के पूरे चुनावी अभियान का जिम्मा संभाल रही कंपनी I-PAC के डायरेक्टर विनेश चंदेल को ईडी के द्वारा गिरफ्तार करने और अब I-PAC के काम बंद करने और अपने कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजे जाने से बंगाल की सियासत में नए खेला हो गया है।
बंगाल में क्यों निशाने पर I-PAC?- इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) को एक चुनावी रणनीतिक कंपनी है, वह लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के लिए काम कर रही है। चुनाव से पहले I-PAC का संचालन करने वाले प्रतीक जैन के ठिकानों पर ईडी की छापेमार कार्रवाई और अब चुनाव के अंतिम दौर में कंपनी के दूसरे डायरेक्टर विनेश चंदेल की गिरफ्तारी से पूरा मामला सियासी हो गया है।
ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का पूरा चुनावी कैंपेन संभाल रही कंपनी I-PAC के विनेश चंदेल की गिरफ्तारी बंगाल चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। विेनेश चंदेल मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के रहने वाले है और आइपैक (I-PAC) के को-फाउंडर और डायरेक्टर है। विनेश चंदेल भोपाल के एनएलआईयू से लॉ (Law) की डिग्री हासिल की है। वहीं कंपनी के दूसरे डायरेक्टर प्रतीक जैन झारखंड के रांची के रहने वाले है और आईआईटी बॉम्बे से पासआउट है। प्रतीक जैन जो टीएमसी के आईटी सेल के हेड भी है के ठिकानों पर बंगाल चुनाव से पहले ईडी ने छापा मारा था।
बंगाल में ममता बनर्जी के लिए क्यों जरूरी I-PAC?-पश्चिम बंगाल में 2022 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी को सत्ता में वापसी लाने में I-PAC की बड़ी भूमिका थी। पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ममता सरकार का द्वारे सरकार, पाड़ा-पाड़ा समाधान अभियान आईपैक की सलाह पर ही शुरु किया गया था। 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता की जीत के पीछे इन दोनों अभियानों की महत्ती भूमिका रही थी। वहीं इस बार पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी की अबार जितबे बंग्ला यात्रा के पीछे भी I-PAC की चुनावी रणनीति है। इसके साथ टीएमसी के लिए पार्टी चयन से लेकर सोशल मीडिया मैनेजमेंट तक का सारा काम आईपैक ही कर रही है।
वहीं बंगाल में महिला वोटर्स को साधने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जो लक्ष्मी भंडार योजना शुरु की है उसके पीछे भी I-PAC की अहम भूमिका है। योजना के तहत महिलाओं को एक हजार से बाहर सौं रुपए सीधे खातों में दिया जाता है। इसके साथ प्रवासी मजदूरों के लिए शुरु की गई श्रमश्री योजना जिसके तहत प्रवासी मजदूरों को 5 हजार रुपए दिए गए, इसके पीछे भी प्रतीक जैन की अहम भूमिका मानी गई। इसके साथ प्रतीक जैन जो टीएमसी के आईटी सेल के हेड भी है वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थन में नैरेटिव गढ़ने में माहिर है। यहीं कारण है कि 2024 लोकसभा चुनाव में भी भाजपा पश्चिम बंगाल में कोई कमाल नहीं दिखा पाई। दअसल पार्टी के सत्ता में रहने पर I-PAC सरकार की नीतियों के निर्माण में भी दखल देती है।
I-PAC के तालाबंदी से क्या ममता को होगा नुकसान?- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की वोटिंग से ठीक I-PAC के डायरेक्टर विनेश चंदेल की गिरफ्तारी और अब I-PAC के राज्य में अपने कामकाज को बंद करने का सीधा असर चुनाव में टीएमसी की पूरी चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक चुनावी रैली में कहा कि अगर IPAC के किसी भी कर्मचारी की नौकरी जाती है, तो वे खुद उन्हें नौकरी देंगी। ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी के पास 50 एजेंसियां हैं, हमारे पास सिर्फ एक (IPAC)है। हमारे पास उतना पैसा नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप उन्हें डराएंगे. मैंने अभिषेक बनर्जी से बात की है, हम IPAC के किसी भी लड़के को नौकरी से हाथ नहीं धोने देंगे. अगर उन्हें निकाला गया, तो मैं उन्हें नौकरी दूंगी।
दरअसल ममता बनर्जी इस बात को अच्छी तरह जानती हैं कि चुनाव के ऐन वक्त पर रणनीतिक टीम I-PAC के काम समटने और उनका मनोबल गिरना पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है, इसीलिए उन्होंने सीधे तौर पर उनकी जिम्मेदारी उठाने का भरोसा दिया है। दरअसल चुनाव के अंतिम दौर में I-PAC जो पूरा चुनावी मैनेजमेंट संभाल रही है उसकी भूमिका बहुत ही प्रभावी हो जाती है। ग्राउंड पर पोलिंग एजेंट की तैनाती से सोशल मीडिया पर अंतिम दौर के चुनाव प्रचार तक I-PAC को बहुत बड़ा रोल होगा। अब जब बंगाल में आज से अंतिम दौर का चुनावी कैंपेन शुरु हो रहा है तो ममता बनर्जी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है।
राजनीतिक सलाहकार के तौर पर काम करने वाली इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) टीएमएसी के चुनावी कैंपेन को डिजाइन करने के साथ-साथ विधानसभा वार पार्टी के उम्मीदवारों का ग्राउंड कैंपेन कर रही है। चुनाव के अंतिम दौर में I-PAC के कर्मचारी उम्मीदवार के अनुसार रणनीति बनाते है। इसके साथ टीएमसी और पार्टी के उम्मीदवारों की डिजिटल मीडिया ब्रॉन्डिंग का काम भी आईपैक बाखूबी देख रही है। चुनावी कैंपेन में स्लोगन, कैंपेनिंग सॉन्ग लिखने और गढने का काम भी आईपैक करती है। सोशल मीडिया के इस दौरान कंपनी पार्टी की सोशल मीडिया पर बॉन्डिग का काम भी करती है।
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विकास सिंह