SIR विवाद : 34 लाख मतदाताओं को नहीं मिलेगा वोट का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को अंतरिम मतदान अधिकार देने से इनकार कर दिया है, जिनकी अपीलें अभी अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 34 लाख मतदाताओं को वोट डालने के लिए अंतरिम अधिकार देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला राज्य के चुनावी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा होने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कमी आएगी और लोगों में चुनावी प्रक्रिया के प्रति असंतोष बढ़ेगा।
मतदान का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इसे तत्काल प्रभाव से नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ, जिसमें सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची शामिल थे, उन मतदाताओं द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं।
कोर्ट ने कहा कि लगभग 30 से 34 लाख अपीलें लंबित हैं, जिनमें से प्रत्येक न्यायाधिकरण एक लाख से अधिक मामलों की सुनवाई कर रहा है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकता है। न्यायालय ने कहा कि मतदान का अधिकार संवैधानिक और लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन मतदाताओं के बड़े पैमाने पर बहिष्करण से प्रक्रिया पर जब तक गंभीर प्रभाव न पड़े, तब तक चुनाव नहीं रोका जा सकता।
इस बीच कलकत्ता हाईकोर्ट की देखरेख में गठित 19 न्यायाधिकरणों ने अपीलों की सुनवाई शुरू कर दी है। राज्य में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा, और मतगणना अगले महीने की 4 तारीख को निर्धारित है। याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची को फ्रीज करने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। उनका तर्क है कि यदि उनकी अपीलें स्वीकार हो जाती हैं तो उन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए। Edited by : Sudhir Sharma

