बंगाल में रिकॉर्ड वोटिंग के बाद BJP की सरकार बनने का दावा अमित शाह का कॉन्फिडेंस या ओवरकॉन्फिडेंस?
पश्चिम बंगाल में पहले चरण में मतदान ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए है। पहले चरण में पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर 93 प्रतिशत मतदान हुआ है। बंगाल में पहले चरण के बाद मतदान के बाद भाजपा ने राज्य में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा कर दिया है। बंगाल में भाजपा की पूरी चुनाव कमाने संभाले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज मीडिया से बात करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा पहले चरण में 152 सीटों से 110 सीटें जीतने जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि बंगाल में प्रचंड बहुमत से भाजपा सरकार बनने जा रही हैं।
पहले चरण के मतदान के बाद भाजपा का आत्मविश्वास उसकी रणनीति और जमीनी फीडबैक पर आधारित जरूर दिखता है, लेकिन इसे पूरी तरह निर्णायक मान लेना अभी जल्दबाजी होगी। अभी जब राज्य मे करीब आधी सीटों पर मतदान होना बाकी है, तब प्रंचड बहुमत से भाजपा का जीत का दावा करना क्या उसका जमीनी कॉन्फिडेंस या इसके एक राजनीतिक ओवरकॉन्फिडेंस माना जाए।
चुनावी विश्लेषकों के मुताबिक जब रिकॉर्ड मतदान होता है तो इसे आमतौर पर एंटीइनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर माना जाता है। भाजपा की ओर से खुद गृहमंत्री अमित शाह भी बंगाल में रिक़ॉर्ड मतदान को सत्ता विरोधी लहर बताने के साथ परिवर्तन की लहर बता रहे है। मीडिया से बात करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बंगाल में ममता सरकार के खिलाफ जो एंटी इंकमबेंसी थी उसके चलते इनकी बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से निकलकर वोट दिए। इसके साथ ही अमित शाह ने यह भी कहा कि पिछले चुनाव में भी पश्चिम बंगाल में भी सत्ता विरोधी लहर थी लेकिन तब भय मुक्त मतदान नहीं हुआ था और लोग डर के मारे वोट करने नहीं निकल पाए थे। लेकिन इस बार SIR के चलते घुसपैठियों के नाम कट गए थे और तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते लोगों ने भय मुक्त होकर मतदान किया है।
रिकॉर्ड वोटिंग से ओवरकॉन्फिडेंस?-बंगाल में पहले चरण की वोटिंग को भाजपा और टीएमसी दोनों ही अपने-अपने पक्ष में बता रही है। पहले चरण में वोटिंग के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में SIR के विरोध में लोगों ने बंपर वोटिंग की है। उन्हो्ने कि विधानसभा चुनाव के पहले चरण में अब तक हुए मतदान से संकेत मिलता है कि तृणमूल कांग्रेस अभी से ही जीत की स्थिति में है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि बंगाल में इतने नाम कटे है कि किसी ने कोई रिस्क नहीं लिया और सभी ने वोट डाला है।
वही बंगाल की राजनीति के जानकार बताते हैं कि बंगाल में जिस तरह से रिकॉर्ड वोटिंग हुई है, उससे भाजपा का आत्मविश्वास पूरी तरह निराधार नहीं है, लेकिन इसके कुछ जोखिम भी हैं। पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद हुए इतने अधिक मतदान का फायदा किसे मिलेगा यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है। राज्य में तृणमूल कांग्रेस का मजबूत कैडर और स्थानीय नेटवर्क अब भी बड़ा फैक्टर है, इसके साथ मुस्लिम बहुल्य इलाकों में मतदान का बड़ा प्रतिशत किस ओर गया यह भी देखना दिचस्प होगा।

