पश्चिम बंगाल में SIR बना ममता की हार और भाजपा की प्रचंड जीत का गेमचेंजर?
पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद एक फिर चुनाव आयोग के द्वारा कराए SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण के लिए चलाए गए SIR ने बंगाल की पूरी चुनावी तस्वीर बदल दी।
वहीं राहुल गांधी ने एक बार वोट चोरी का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी ने लिखा कि वोट चोरी से कभी सीटें चुराई जाती हैं, कभी पूरी सरकार। लोकसभा के 240 BJP सांसदों में से, मोटे तौर पर हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है। पहचानना मुश्किल नहीं- क्या उन्हें BJP की भाषा में “घुसपैठिए” कहें? और हरियाणा? वहाँ तो पूरी सरकार ही “घुसपैठिया” है। जो संस्थाएँ अपनी जेब में रखते हैं, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ देते हैं- वो ख़ुद “remote controlled” हैं। उन्हें असली डर सच्चाई का है। क्योंकि निष्पक्ष चुनाव हो जाएँ, तो आज ये 140 के पास भी नहीं जीत सकते।
पश्चिम बंगाल में SIR बना गेमचेंजर?-बंगाल चुनाव में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच वोटों का गणित SIR के कारण उलझ गया है। विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 46 प्रतिशत रहा, जबकि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस 41 प्रतिशत रहा। दोनों ही पार्टियों के बीच वोट शेयर में 5 फीसदी के अंतर रहा है। लेकिन 5 प्रतिशत अधिक वोट हासिल कर भाजपा ने 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया,जबकि टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में 91 लाख वोटर्स के नाम SIR के तहत हटाए गए । वहीं फॉर्म 7 (वोट हटाने) और फॉर्म 6 (नए वोट जोड़ने) की प्रक्रिया के बाद करीब 30 लाख वोटों का अंतर भाजपा और टीएमसी के बीच हार-जीत का मुख्य कारण माना जा रहा है।
पश्चिम बंगाल में SIR यानी मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण अभियान, जिसका उद्देश्य फर्जी, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना था। राज्य में करीब 91 लाख नाम हटाए गए, जो कुल मतदाताओं का लगभग 12 प्रतिशत है।विपक्षी दलों और कई विशेषज्ञों का तर्क है कि जिन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए, वहां चुनावी नतीजे पूरी तरह बदल गए। पश्चिम बंगाल में 25 ऐसी सीटें हैं जहां भाजपा की जीत का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से कम है जिन्हें अयोग्य घोषित कर वोटर लिस्ट हटा दिया गया था। वहीं चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 128 सीटें 30 हजार से कम मार्जिन से बीजेपी ने जीतीं, जबकि एसआईआर में 30 हजार वोटर हर सीट पर कम हुए।
पश्चिम बंगाल की कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा। वहीं अगर वोट प्रतिशत देखा जाए तो भाजपा ने 62 प्रतिशत सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं। वहीं टीएमसी 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम और 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक विधानसभा चुनाव में भाजपा को तृणमूल कांग्रेस के मुकाबले 32 लाख वोट ज्यादा मिले। यानि भाजपा को बंगाल में कुल 2 करोड़ 92 लाख 24 हजार 804 और तृणमूल को 2 करोड़ 60 लाख13 हजार 377 वोट मिले यानी कुल वोट का अंतर 32 लाख 11 हजार 427 रहा। 293 सीटों के हिसाब से औसत निकालें तो प्रति सीट भाजपा को 10,960 वोट ज्यादा। भवानीपुर से ममता बनर्जी भाजपा के के शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों से चुनाव हार गईं। इस सीट पर भी हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर से अधिक बताई जा रही है। वहीं अब चुनाव नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के जरिए उनके मतदाताओं शेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के नाम काटकर भाजपा को फायदा पहुँचाया गया।
लेखक के बारे में
विकास सिंह