बंगाल में BJP का शू्न्य तक का सफर, आखिर कैसे ढह गया ममता बनर्जी का किला
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहली बार अपने दम पर सरकार बनाने की ओर बढ़ती नजर आ रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों में भाजपा अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही है। भाजपा ने ममता बनर्जी के 15 सालों के साम्राज्य खत्म कर दिया है।
यह बदलाव न सिर्फ पार्टी की रणनीति और संगठन क्षमता को दर्शाता है, बल्कि बंगाल के मतदाताओं के बदलते रुझान का भी संकेत है। इस चुनाव में नजरें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर थी। ममता बनर्जी एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार पर खूब क्रोधित थीं।
टीएमसी और भाजपा दोनों पार्टियां चुनाव प्रचार में मां, मानुष, माटी की बात करती रहीं। पीएम मोदी ने झालमुड़ी खाने से लेकर फुटबॉल के मैदान और हुगली से फोटोग्राफी कर बंगाल के मतदाताओं को रिझाया। कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में भाजपा का यह सफर शून्य से शिखर तक पहुंचने की कहानी है- एक ऐसी कहानी, जिसमें दशकों की मेहनत, राजनीतिक संघर्ष और जनाधार के विस्तार का समावेश है।
बीजेपी के संस्थापक बंगाल से, पर नहीं चला जादू
भाजपा की जड़ें 1980 में पड़ी थीं, जब जनसंघ के नेताओं ने मिलकर इस पार्टी की स्थापना की। जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संबंध भी पश्चिम बंगाल से रहा है, जिससे राज्य में पार्टी का वैचारिक आधार पहले से मौजूद था। इसके बावजूद शुरुआती वर्षों में पार्टी को बंगाल की राजनीति में खास सफलता नहीं मिल सकी।
अगर इतिहास को देखें तो 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में जनसंघ को महज 9 सीटों से संतोष करना पड़ा था। इसके बाद 1967 में पार्टी सिर्फ एक सीट पर सिमट गई। लंबे समय तक भाजपा (और उससे पहले जनसंघ) बंगाल की राजनीति में हाशिए पर ही रही।
2011 में नहीं खुला खाता, 2021 बना आधार
स्थिति इतनी कमजोर थी कि 2011 तक भाजपा पश्चिम बंगाल विधानसभा में अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी, लेकिन 2016 का चुनाव पार्टी के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ, जब भाजपा ने पहली बार 3 सीटें जीतकर विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद 2021 के चुनाव में भाजपा ने जबरदस्त छलांग लगाई और 77 सीटों पर जीत हासिल की। यह परिणाम पार्टी के लिए एक मजबूत आधार बना, जिसने बंगाल की राजनीति में उसे मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित कर दिया। Edited by : Sudhir Sharma

