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क्या ममता बनर्जी के अपने 'गढ़' में सेंध लग चुकी है? भाई कार्तिक बनर्जी बोले दीदी की जीत तय नहीं

mamata bhavanipur
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण से पहले राज्य की सबसे प्रतिष्ठित सीट, भवानीपुर, एक अप्रत्याशित मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सगे भाई, कार्तिक बनर्जी का यह स्वीकार करना कि "स्थिति अनिश्चित है", न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है, बल्कि यह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की गहरी चिंताओं को भी उजागर करता है। ALSO READ: TMC सांसद मिताली बाग ने कार में रोते हुए वीडियो किया शेयर, BJP कार्यकर्ताओं पर कार में तोड़फोड़ का आरोप
 

अपनों के बीच 'अनिश्चितता' का अहसास

कालीघाट के राजनीतिक केंद्र में बैठे कार्तिक बनर्जी का तनावपूर्ण चेहरा बंगाल चुनाव की बदलती हकीकत बयां कर रहा है। पिछले पांच महीनों से चौबीसों घंटे चुनावी रणनीति में जुटे कार्तिक बनर्जी का यह बयान कि "दीदी की जीत तय नहीं है", सामान्य चुनावी बयानबाजी से हटकर है।
 
कड़ी मेहनत और पारिवारिक साख: कार्तिक की पत्नी, काजरी बनर्जी (वार्ड 73 की पार्षद), पर मुख्यमंत्री को उनके अपने वार्ड से बड़ी बढ़त दिलाने का भारी दबाव है।
 
प्रशासनिक घेराबंदी का आरोप: कार्तिक बनर्जी ने चुनाव आयोग और पुलिस पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि TMC को रैलियों की अनुमति मिलने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने मुहावरे का प्रयोग करते हुए कहा कि उन्हें 'ठूंठो जगन्नाथ' (असहाय) बना दिया गया है। ALSO READ: बंगाल को अब TMC से मुक्ति दिलाने का समय, बुलडोजर बाबा की झलक के लिए उमड़े लोग
 

आंकड़ों की जुबानी: 2021 बनाम 2024

भवानीपुर को TMC का अभेद्य किला माना जाता रहा है, लेकिन हालिया चुनावी रुझान कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। यदि हम आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो भाजपा की बढ़ती पैठ साफ नजर आती है: 
 
चिंता का विषय: 2024 के लोकसभा चुनावों में, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वार्ड 63, 70, 71, 72 और 74 में भाजपा ने बढ़त बनाई थी। यह गिरावट संकेत देती है कि शहरी और हिंदी भाषी मतदाताओं का मोहभंग पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
 

रणनीतिक घेराबंदी: 'राम' बनाम 'ममता'

कार्तिक बनर्जी को उम्मीद है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के मुद्दे अलग होते हैं। उनकी रणनीति के केंद्र में दो मुख्य बिंदु हैं:
 
जनसांख्यिकीय प्रबंधन: हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी भाषी कार्यकर्ता और बंगाली बहुल क्षेत्रों में महिला कार्यकर्ताओं (महिला ब्रिगेड) की तैनाती।
 
'बाहरी' बनाम 'धर की बेटी': सुवेंदु अधिकारी को 'बाहरी' बताकर स्थानीयता का कार्ड खेलना।
 
दूसरी ओर, भाजपा (BJP) की रणनीति अत्यंत सूक्ष्म है। भाजपा उन पॉश इलाकों (शेक्सपियर सरणी, पार्क स्ट्रीट) में मतदान प्रतिशत बढ़ाने पर केंद्रित है, जहाँ आमतौर पर कम मतदान होता है। भगवा खेमे का मानना है कि यदि इन 'साइलेंट' वोटर्स को पोलिंग बूथ तक लाया गया, तो वे 2026 में बंगाल का सबसे बड़ा उलटफेर कर सकते हैं।
 

प्रतिष्ठा की अंतिम लड़ाई

ममता बनर्जी के लिए भवानीपुर सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक पहचान का प्रतीक है। 2021 में नंदीग्राम की हार के बाद, भवानीपुर ने ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बरकरार रखा था। यदि उनके अपने भाई और चुनाव प्रबंधक कार्तिक बनर्जी 'अनिश्चितता' की बात कर रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि ज़मीनी हकीकत सत्ताधारी दल के अनुकूल नहीं है।
 
भवानीपुर का चुनाव इस बार केवल विकास या विचारधारा पर नहीं, बल्कि 'अस्तित्व' पर टिका है। क्या मतदाता 2024 के लोकसभा पैटर्न को दोहराएंगे या अपनी 'दीदी' के प्रति वफादारी दिखाएंगे? 2026 का परिणाम बंगाल की राजनीति की अगली दिशा तय करेगा।
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