क्या है महिलाओं का 'लुक गुड, फील गुड' फॉर्मूला?

क्या आपने कभी सोचा है कि मेकअप करने के बाद अचानक आपका मूड अच्छा क्यों हो जाता है? आइए जानें इसके पीछे की सच्चाई...

AI/Webdunia

कई लोगों को लगता है कि मेकअप सिर्फ अच्छा दिखने के लिए किया जाता है और ये बेकार की चीज है।

लेकिन क्या आप इसके पीछे का मनोवैज्ञानिक कारण जानते हैं?

दरअसल, मेकअप करने से अच्छा दिखने का अहसास होता है, जो मूड को बेहतर बनाता है।

मेकअप पर फोकस करने से तनाव और नेगेटिव थॉट्स कम हो जाते हैं।

मेकअप करने से महिलाएं खुद में अधिक आत्मविश्वासी महसूस करती हैं, जिससे मूड पॉजिटिव हो जाता है।

मेकअप का प्रोसेस खुद को समय देने का एहसास कराता है, जो डोपामिन हॉर्मोन रिलीज करके खुशी बढ़ाता है।

मेकअप करते वक्त वो प्रोसेस थेरेपी जैसा आराम देता है, जिससे तनाव घटता है।

आप इसमें कलर थेरेपी का प्रभाव भी देख सकते हैं। लिपस्टिक और आईशैडो के ब्राइट कलर्स मूड को पॉजिटिव एनर्जी से भर देते हैं।

मेकअप के बाद सेल्फी लेने और तारीफ पाने से मूड बूस्ट होता है।

इसलिए मेकअप एक क्रिएटिव एक्सप्रेशन है, जो मेंटल पीस और खुशी का अनुभव देता है।