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Last Modified: लखनऊ (उप्र) , शनिवार, 23 मई 2026 (23:56 IST)

मौसम आपदाओं से निपटने के लिए यूपी में मजबूत होगी चेतावनी प्रणाली

Warning system in UP will be strengthened to deal with weather-related disasters
- गांवों तक पहुंचे मौसम अलर्ट, लाउडस्पीकर और मोबाइल संदेशों के इस्तेमाल पर मुख्यमंत्री का जोर
- तकनीक और जनसहभागिता से मौसम आपदाओं के लिए तैयार होगा उत्तर प्रदेश
- यूपी में 450 वेदर स्टेशन और 2000 रेन गेज से हो रही मौसम की निगरानी
- 13 मई के आंधी-तूफान की समीक्षा, कई जिलों में जारी हुआ था रेड अलर्ट
- मुख्यमंत्री योगी ने दिए त्वरित और जनकेंद्रित मौसम अलर्ट के निर्देश
Uttar Pradesh News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक, त्वरित तथा जनकेंद्रित बनाने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर दी गई सही सूचना अनेक लोगों का जीवन बचा सकती है। इसलिए मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी तंत्र को केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों में “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” मजबूत करने, आईवीआरएस, पंचायत स्तर के लाउडस्पीकर, स्थानीय एफएम रेडियो, मोबाइल अलर्ट तथा सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग करने के निर्देश दिए।
 
बैठक में 13 मई 2026 को आए भीषण आंधी-तूफान की समीक्षा प्रस्तुत की गई। बताया गया कि आईएमडी के मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम (एमएचईडब्ल्यूएस) द्वारा इस घटना की सात दिन पहले से निगरानी की जा रही थी। प्रारंभ में येलो वार्निंग जारी की गई, जिसे बाद में ऑरेंज वार्निंग तथा कई जिलों में रेड अलर्ट में अपग्रेड किया गया। चेतावनियों में तेज आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रफ्तार वाली हवाओं की आशंका जताई गई थी। कई स्थानों पर हवा की गति 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई।
बैठक में बताया गया कि भदोही, प्रयागराज, फतेहपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, रायबरेली, कानपुर नगर और उन्नाव सहित अनेक जिलों के लिए 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक की हवा चलने संबंधी नाउकास्ट अलर्ट जारी किए गए थे। “सचेत” प्लेटफॉर्म के माध्यम से कलर-कोडेड अलर्ट जिला प्रशासन, डीडीएमए, आपदा मित्रों और संबंधित विभागों तक पहुंचाए गए। प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय मोबाइल फोनों पर एसएमएस आधारित चेतावनियां भी भेजी गईं।
 
पूरी घटना के दौरान लगातार एसएमएस अलर्ट जारी किए गए। स्थानीय टीवी चैनलों, एफएम रेडियो, व्हाट्सएप समूहों, ग्राम प्रधानों, लेखपालों तथा आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी व्यापक स्तर पर सूचना प्रसारित की गई। मुख्यमंत्री ने मौसम संबंधी पूर्व सूचना मिलने के बाद संबंधित जिलाधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चेतावनी जारी करने के साथ-साथ लोगों में सुरक्षित व्यवहार को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। उन्होंने स्कूलों, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही पेड़ों, बिजली के खंभों, होर्डिंग्स और कमजोर अस्थायी संरचनाओं की संवेदनशीलता का स्थानीय स्तर पर आकलन कर एसओपी तैयार करने को कहा।
 
बैठक में बताया गया कि आईएमडी द्वारा डॉप्लर वेदर रडार, ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस), ऑटोमैटिक रेन गेज स्टेशन (एआरजी), लाइटनिंग सेंसर, सैटेलाइट इमेज तथा न्यूमेरिकल वेदर प्रिडिक्शन मॉडल्स के माध्यम से प्रदेश में मौसम की लगातार निगरानी की जा रही है। मीडियम रेंज फोरकास्ट (4-5 दिन), शॉर्ट रेंज फोरकास्ट (2-3 दिन) तथा नाउकास्ट (3 घंटे तक) स्तर पर थंडरस्टॉर्म और लाइटनिंग गतिविधियों का पूर्वानुमान जारी किया जाता है।
 
प्रदेश में 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन तथा 2000 ऑटोमैटिक रेन गेज स्थापित किए जा चुके हैं। अलीगढ़, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि बरेली, देवरिया और प्रयागराज में अतिरिक्त रडार लगाने की प्रक्रिया जारी है। लखनऊ और प्रयागराज में विंड प्रोफाइलर रडार स्थापित किए जाने की कार्यवाही भी प्रगति पर है।
बैठक में बताया गया कि यूएनडीपी के सहयोग से प्रदेश के 15 विभागों, सभी 75 जिलों तथा 20 प्रमुख नगरों के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में 44 जिलों की 118 तहसीलों में लगभग 1800 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनके माध्यम से 2361 गांवों और 4824 मजरों में जनजागरूकता अभियान चलाया गया। “आपदा मित्र” स्वयंसेवकों को बीमा प्रमाण-पत्र वितरित किए गए हैं तथा नाव दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए 38 जिलों में 66,077 लाइफ जैकेट वितरित किए गए हैं।
Edited By : Chetan Gour
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