Kanwar Yatra: मेरठ में अभेद सुरक्षा घेरा! AI कैमरे, ड्रोन और 34 हजार कैमरों से निगरानी, सोशल मीडिया पर भी नजर
श्रावण मास में निकलने वाली देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा आज से शुरू हो गई है। शिव भक्तों की इस यात्रा को लेकर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का कहा है कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आस्था, अनुशासन और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। पैदल चलकर करोड़ों शिवभक्त अपनी अटूट श्रद्धा के चलते कंधे पर गंगाजल लेकर लंबी पदयात्रा करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मेरठ रेंज में कांवड़ यात्रा को सकुशल, शांतिपूर्ण और ढंग से करवाने के लिए मेरठ रेंज पुलिस ने सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए हैं। मेरठ, बागपत, बुलंदशहर और हापुड़ जनपदों में हाई अलर्ट घोषित करते हुए अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से यात्रा की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। पुलिस ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई लेअर सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि पूरे मेरठ रेंज में कांवड़ यात्रा की पल-पल की मॉनिटरिंग के लिए विशेषज्ञ टीमों की तैनाती की गई है। हरियाणा सीमा और प्रमुख मार्गों पर ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक से लैस 20 स्मार्ट कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा लगभग 4,000 आईपी (IP) कैमरे सीधे कंट्रोल रूम से जुड़े हुए हैं, जिनकी निगरानी प्रशिक्षित कर्मी कर रहे हैं। वहीं ऑपरेशन दृष्टि के तहत पहले करीब 30,000 कैमरे संचालित है जो इस यात्रा को सुरक्षा दृष्टि मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
हाईटेक सर्विलांस कंट्रोल रूम से होगी 24 घंटे निगरानी
मेरठ पुलिस लाइन में अत्याधुनिक सर्विलांस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से कांवड़ यात्रा मार्ग, प्रमुख चौराहों, संवेदनशील क्षेत्रों, शिविरों और घाटों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। कंट्रोल रूम में फाइबर ऑप्टिकल आधारित आधुनिक सर्विलांस प्रणाली स्थापित की गई है, जिसके माध्यम से 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की निगरानी होगी। इनमें 250 एआई (AI) इनेबल्ड कैमरों की लाइव स्ट्रीमिंग भी शामिल है।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि, भीड़ की असामान्य स्थिति या आपात परिस्थिति की जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों और फील्ड में तैनात पुलिस टीमों तक पहुंचाई जाएगी। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का भी व्यापक उपयोग किया जाएगा।
कई राज्यों की पुलिस के बीच रहेगा सीधा समन्वय
मेरठ का हाईटेक कंट्रोल रूम उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान पुलिस के कम्युनिकेशन नेटवर्क से जोड़ा गया है। इससे यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
सोशल मीडिया पर 24 घंटे पैनी नजर
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है। यदि कोई व्यक्ति माहौल खराब करने की नीयत से पुराना वीडियो या भ्रामक सामग्री वायरल करता है अथवा अफवाह फैलाने का प्रयास करता है तो उसकी तत्काल तकनीकी जांच कर एफआईआर दर्ज करते हुए कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
व्यापक सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था
कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए एआई कैमरे, ड्रोन सर्विलांस, स्थायी एवं अस्थायी पुलिस चौकियां, विशेष ट्रैफिक प्लान, क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), वायरलेस संचार व्यवस्था, नावें, गोताखोर तथा अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। कंट्रोल रूम से सभी गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी, ताकि किसी भी स्थिति से तत्काल निपटा जा सके।
श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील
मेरठ पुलिस ने कांवड़ यात्रियों और आम नागरिकों से शांति, सौहार्द और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है। पुलिस ने लोगों से अनुरोध किया है कि किसी भी अपुष्ट सूचना या अफवाह पर विश्वास न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
कांवड़ यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
सावन मास में भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक कांवड़ यात्रा सनातन परंपरा की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। करोड़ों शिवभक्त उत्तराखंड के हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं।
मान्यता है कि सावन में भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है। कांवड़ यात्रा केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी अनुपम उदाहरण है। यात्रा के दौरान जगह-जगह लगाए जाने वाले सेवा शिविर, भंडारे और चिकित्सा सहायता केंद्र भारतीय समाज की सेवा भावना और सामूहिक सहयोग की परंपरा को भी जीवंत करते हैं।
इस वर्ष लगभग 12 दिनों तक चलने वाली कांवड़ यात्रा में लाखों शिवभक्त उत्तराखंड की पवित्र गंगा से जल भरकर अपने गंतव्यों तक पैदल पहुंचेंगे। इसे देखते हुए मेरठ रेंज पुलिस ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक और तकनीक आधारित प्रबंध किए हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित, सहज और शांतिपूर्ण वातावरण में अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें।

