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Last Updated :लखनऊ , मंगलवार, 13 जनवरी 2026 (09:44 IST)

CM योगी का विजन, गाय बनेगी मजबूत अर्थव्यवस्था का आधार, बड़ी संख्या में गो पालकों को होगी आमदनी

Uttar Pradesh
देश में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश तेजी से लीडिंग स्टेट के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत अब बड़ी मात्रा में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाकर क्रूड ऑयल और एलपीजी पर निर्भरता घटाने की ठोस रणनीति पर काम हो रहा है। बायोगैस बनाने में अधिक पैमाने पर गाय के गोबर का सदुपयोग किया जाएगा, जिसका सबसे ज्यादा लाभ गोपालकों को मिलेगा। इस योजना में 26 से अधिक सीबीजी प्लांट लगाए जा चुके हैं। एक वैज्ञानिक आंकलन के अनुसार यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 500 करोड़ रुपये तक की बचत की संभावना बन सकती है।
 
2022 से अब तक यूपी नेडा के अंतर्गत प्रदेश में 26 से अधिक सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें लखनऊ, गोरखपुर, मथुरा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, बाराबंकी, बदायूं, बरेली और मिर्जापुर जिलों में उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 21 से अधिक नए सीबीजी प्लांट निर्माणाधीन हैं।
सीबीजी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए कार्ययोजना
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि सीबीजी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना लागू की जा रही है। प्राथमिक तकनीकी आकलनों के अनुसार एक देशी गाय से प्रतिदिन औसतन लगभग 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है, जिससे मीथेन युक्त बायोगैस का उत्पादन संभव है। गो सेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि परिशोधन के बाद यही गैस सीबीजी के रूप में रसोई और वाहनों में उपयोग की जा सकती है। यदि प्रदेश में गायों के गोबर से मीथेन का दोहन किया जाए, तो पेट्रोलियम उत्पादों पर होने वाले व्यय में उल्लेखनीय कमी की संभावना बन सकती है।
 
गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी
एक वैज्ञानिक आंकलन के अनुसार यूपी में एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 500 करोड़ रुपये तक की बचत की संभावना बन सकती है। इससे अन्य देशों से आयात होने वाले कच्चे तेल और एलपीजी पर निर्भरता भी घटेगी। बाराबंकी का निजी सहभागिता वाला सीबीजी प्लांट और मथुरा की श्री माताजी गौशाला जैसे प्रयोग इस मॉडल की व्यवहारिक सफलता के उदाहरण हैं।  गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैव-उर्वरक और जैव-उर्वरक से कृषि उत्पादकता का यह चक्र गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राज्य को ऊर्जा सुरक्षा की ओर ले जाएगा। Edited by: Sudhir Sharma