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Last Modified: लखनऊ (उप्र) , शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 (14:46 IST)

उत्तर प्रदेश को आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लक्ष्य में बौद्ध सर्किट बनेगा मजबूत नींव

Buddhist Circuit will serve as a strong foundation in mission to establish Uttar Pradesh as a spiritual capital
- 3 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव से बौद्ध पर्यटन केंद्रों में जुड़ेंगे कई ऐतिहासिक अध्याय
- इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव 2026 ने कुशीनगर में दिखाई असीम संभावनाओं की राह
- वर्ष 2025 में 6 प्रमुख बौद्ध स्थलों पर 82 लाख से अधिक पर्यटकों का हुआ आगमन 
Uttar Pradesh News : उत्तर प्रदेश को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की योगी सरकार की आकांक्षा में बौद्ध सर्किट एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनने जा रहा है। सारनाथ से कुशीनगर और श्रावस्ती से कपिलवस्तु तक फैला यह आध्यात्मिक गलियारा अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहा, यह वैश्विक पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक कूटनीति का एक शक्तिशाली माध्यम बन रहा है। हाल ही में कुशीनगर में संपन्न हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव 2026 ने इस दिशा में एक नया अध्याय जोड़ा है जिसने इन केंद्रों पर वैश्विक निवेश के दरवाजे खोले हैं जो उत्तर प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे। 
 

आस्था से अर्थव्यवस्था तक का सफर

उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट लगातार मजबूत हो रहा है और इसके आंकड़े स्वयं इसकी कहानी कह रहे हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश के छह प्रमुख बौद्ध स्थलों सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशाम्बी, संकिसा और कपिलवस्तु पर 82 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। यह संख्या बताती है कि विश्वभर के बौद्ध अनुयायी और पर्यटकों की दृष्टि में अब उत्तर प्रदेश की पहचान एक अनिवार्य आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में उभरी है।
इन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, डिजिटल गाइडेंस और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पर्यटन सेवाओं से जोड़ा जा रहा है, ताकि विदेशी पर्यटकों के लिए अनुभव को सहज और आकर्षक बनाया जा सके। बौद्ध सर्किट स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रहा है। होटल उद्योग, परिवहन सेवाएं, टूर गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
 

कुशीनगर कॉन्क्लेव से वैश्विक मंच पर यूपी की छाप

कुछ दिनों पहले हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव 2026 ने कुशीनगर को एक बार फिर विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर केंद्र में ला खड़ा किया है। इस भव्य आयोजन में 2,300 से अधिक बौद्ध श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जबकि थाईलैंड, जापान, म्यांमार, भूटान और नेपाल से आए विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने इसे वास्तविक अर्थों में अंतरराष्‍ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह रही कि कॉन्क्लेव के दौरान 3,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। यह आंकड़ा सिद्ध करता है कि बौद्ध सर्किट केवल श्रद्धा की धरती ही नहीं, बल्कि निवेश और विकास की उर्वर भूमि भी है।

2047 का विजन को बौद्ध सर्किट से मिलेगी उड़ान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के धार्मिक पर्यटन के विजन से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था निरंतर मजबूती की ओर अग्रसर है। पर्यटन विभाग के ‘विकसित उत्तर प्रदेश@2047’ का रोडमैप इसे और विस्तार देगा जिसमें बौद्ध सर्किट की भी बड़ा योगदान होगा। इस रोडमैप के तहत राज्य का लक्ष्य है कि पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान मौजूदा 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 16 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासत स्थलों की संख्या, जो अभी सात है, उसे बढ़ाकर 20 तक ले जाने की महत्वाकांक्षी योजना है। 

आध्यात्मिक राजधानी का सपना, बौद्ध सर्किट की ताकत

भगवान बुद्ध ने जिस धरती पर अपना पहला उपदेश दिया, जहां उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया और जहां उनके अनुयायियों ने सदियों तक ज्ञान की लौ जलाए रखी, वह धरती आज उत्तर प्रदेश के रूप में एक नई वैश्विक पहचान गढ़ने को तैयार है। राज्य सरकार की सुनियोजित नीतियां, अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों की सफलता और बढ़ते निवेश प्रस्तावों ने यह पहचान गढ़ी है।
Edited By : Chetan Gour
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