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मौसम की अनिश्चितता के बीच CM योगी का बड़ा फैसला, किसानों को हर सुविधा समय पर देने के निर्देश

Amid uncertainty of weather Chief Minister Yogi Adityanath took big decision
- खरीफ अभियान, पेयजल, पशुधन संरक्षण एवं जल संरक्षण की तैयारियों की मुख्यमंत्री योगी ने की विस्तृत समीक्षा
- बीज, उर्वरक, सिंचाई और फसली ऋण की व्यवस्था पर विशेष जोर, जमीनी स्तर पर हो सतत निगरानी
- खरीफ अभियान को मिशन मोड में संचालित करें, किसानों को समय पर उपलब्ध हों सभी संसाधन- पशुधन संरक्षण, चारा भंडारण और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा के अंतर्गत आने वाले विभागों की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि मौसम की अनिश्चितता और वर्षा के बदलते स्वरूप को देखते हुए प्रदेश को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है। ऐसे में किसानों को समय पर बीज, उर्वरक, सिंचाई जल, विद्युत आपूर्ति, फसली ऋण तथा वैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पूर्व तैयारी रखने के निर्देश दिए। 
 
बैठक में बताया गया कि खरीफ 2026 के लिए 110.65 लाख हेक्टेयर आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि वर्ष 2025 में 106.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी। इस वर्ष धान उत्पादन का लक्ष्य 224.25 लाख मीट्रिक टन तथा कुल खरीफ उत्पादन का लक्ष्य 302.62 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। 22 जून तक 5.88 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई तथा 4.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान नर्सरी का आच्छादन हो चुका है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि खरीफ अभियान को मिशन मोड में संचालित करते हुए किसानों को समय पर सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
 
संभावित अल्पवृष्टि अथवा सूखे की स्थिति के दृष्टिगत तैयारियों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि कृषि विभाग द्वारा विभिन्न परिस्थितियों के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है। आवश्यकता पड़ने पर उर्द, मूंग, ज्वार, बाजरा, तिल तथा अन्य कम अवधि वाली फसलों के आच्छादन को बढ़ाया जाएगा।

किसानों को संदेश सेवा, आकाशवाणी, दूरदर्शन तथा अन्य माध्यमों से कृषि संबंधी तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधिकतम कवरेज तथा किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अधिकाधिक किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
 
बीज उपलब्धता की समीक्षा में बताया गया कि खरीफ 2026 में अनुदान पर बीज वितरण का लक्ष्य 2.29 लाख क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष 1.77 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध कराया जा चुका है तथा 1.12 लाख क्विंटल से अधिक बीज का वितरण किया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में गुणवत्तापूर्ण बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित रहे और किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए।
 
उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता की नियमित निगरानी की जाए तथा कृत्रिम कमी अथवा कालाबाजारी की किसी भी शिकायत पर कठोर कार्रवाई की जाए।
 
उद्यान विभाग की समीक्षा में बताया गया कि सूखा प्रबंधन की रणनीति के तहत 125 हाईटेक नर्सरियों के माध्यम से 15 करोड़ सब्जी पौध उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने सिंचाई तथा लघु सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि नहर प्रणाली का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए और अंतिम छोर तक सिंचाई जल पहुंचाया जाए।

प्रत्येक ब्लॉक एवं तहसील स्तर पर सिंचाई संसाधनों तथा कृषि आवश्यकताओं का आकलन किया जाए। कम सिंचाई वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों के उपयोग में पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
 
पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने संभावित सूखे की स्थिति में पशुओं के लिए चारा, पानी और चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 10 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं।

भूसा संग्रहण अभियान के अंतर्गत 131.40 लाख क्विंटल के लक्ष्य के सापेक्ष 136.01 लाख क्विंटल भूसा संग्रहित किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 103 प्रतिशत है। पशुओं के लिए टीकाकरण अभियान निरंतर संचालित हैं तथा मोबाइल वेटनरी यूनिट्स के माध्यम से चौबीसों घंटे सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने चारा भंडारण तथा पशु स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।
 
पंचायती राज विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ग्राम पंचायत स्तर पर पेयजल स्रोतों के संरक्षण, हैंडपंपों के अनुरक्षण, तालाबों के पुनर्जीवन तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को अभियान के रूप में संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
Edited By : Chetan Gour
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