1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. उत्तर प्रदेश
  4. allium hookeri and giant leek medicinal benefits ccsu meerut research for farmers and health

CCSU के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, प्याज-लहसुन परिवार की इन 2 प्रजातियों में मिले कैंसर और डायबिटीज से बचाव के गुण

CCSU Meerut Research
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू), मेरठ के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे शोध का खुलासा किया है, जो आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है। विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में किए गए अध्ययन में एलियम (Allium) परिवार की दो विशेष प्रजातियों—एलियम हूकेरी (Allium hookeri) और एलियम एम्पेलोप्रासम (Allium ampeloprasum)—में कई औषधीय गुण पाए गए हैं। एलियम वही पौधों का परिवार है, जिसमें लहसुन और प्याज जैसी फसलें शामिल हैं, जिनका हर घर में इस्तेमाल होता है।
शोध में सामने आया है कि इन दोनों नई प्रजातियों में ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं और आने वाले समय में स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में नई पहचान बना सकती हैं।

वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर विजय मलिक के निर्देशन में शोधार्थी दीप्ति तेवतिया द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि इन पौधों में ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट, जीवाणुरोधी, मधुमेह नियंत्रण और कैंसर से बचाव के गुण पाए गए हैं।

यही कारण है कि भविष्य में इनका उपयोग हर्बल दवाओं और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के निर्माण में किया जा सकता है। किसानों के लिए खुल सकते हैं नए अवसर शोध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन दोनों प्रजातियों की खेती पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जलवायु और मिट्टी में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। वर्तमान में इनकी खेती मुख्य रूप से उत्तराखंड, मणिपुर और कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में की जाती है।
यदि किसानों को इनके उत्पादन और बाजार की उचित जानकारी उपलब्ध कराई जाए, तो ये फसलें पारंपरिक खेती का लाभदायक विकल्प बन सकती हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने के नए रास्ते खुलेंगे। स्वास्थ्य के लिए भी हैं लाभकारी एलियम हूकेरी (Allium hookeri) का उपयोग पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय से सर्दी-जुकाम, खांसी, पाचन संबंधी समस्याओं और सूजन के उपचार में किया जाता रहा है। वहीं एलियम एम्पेलोप्रासम (Allium ampeloprasum) जिसे जायंट लीक या वाइल्ड लीक भी कहा जाता है, हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, रक्तचाप नियंत्रित रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन पौधों में मौजूद प्राकृतिक यौगिक भविष्य में कई स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों और प्राकृतिक औषधियों का आधार बन सकते हैं।
कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नई दिशा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में जहां लहसुन और प्याज का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, वहीं एलियम परिवार की इन नई प्रजातियों का विस्तार किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है। साथ ही औषधीय पौधों के उत्पादन को नई दिशा और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों को भी मजबूती मिलेगी। सीसीएसयू में किया गया यह शोध न केवल वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि यह संकेत भी है कि खेती और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभी अनेक नई संभावनाएं मौजूद हैं। आने वाले समय में एलियम हूकेरी और एलियम एम्पेलोप्रासम किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती हैं। Edited by : Sudhir Sharma
लेखक के बारे में
हिमा अग्रवाल
अगला लेख
इंदौर में किसान का अपहरण, वाट्सऐप पर मांगी फिरोती, 20 लाख लेकर छुडाने पहुंचा आधा गांव