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कांगो में तेजी से फैल रहा इबोला, दांव पर लगी जिंदगियां, 277 लोगों की गई जान
कांगो में इबोला वायरस (Ebola virus) को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए जिस गति से प्रयास किए जा रहे हैं, यह बीमारी उससे कहीं अधिक रफ़्तार से फैल रही है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में संक्रमित व्यक्तियों की स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक सम्पर्क व जागरूकता में प्रगति दर्ज की गई है। फ़िलहाल 1094 संक्रमण मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 277 लोगों की जान गई है।
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बुधवार को जिनीवा में बताया कि इबोला वायरस का बुंडिबुग्यो प्रकार क़रीब एक महीने पहले फैलना शुरू हुआ था। इसके बाद अग्रिम पंक्ति पर डटे राहतकर्मियों ने अभूतपूर्व तेज़ी से देखभाल सेवाओं का विस्तार किया है और परीक्षण क्षमता को मज़बूती दी गई है मगर ज़मीनी स्तर पर हालात अब भी कठिन हैं।
पांच सप्ताह पहले इस प्रकोप के बारे में पहली बार जानकारी सामने आने के बाद से अब तक जवाबी कार्रवाई का स्तर बढ़ते हुए देखना उत्साहजनक है। एक महीने के भीतर 19 स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों में 10 बिस्तरों से बढ़ाकर 500 की व्यवस्था की गई है। राजधानी किंशासा में प्रति दिन पहले 30 परीक्षण हो रहे थे, लेकिन अब तीन प्रान्तों में 9 प्रयोगशालाओं में प्रतिदिन 2 हज़ार टैस्ट की व्यवस्था है।
स्थानीय समुदाय में भी इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और लोग अपने बचाव के लिए उपायों व उपलब्ध साधनों के बारे में जानकारी चाहते हैं। अभी तक 100 से अधिक संक्रमित इस बीमारी से उबर चुके हैं और यह उम्मीद जताई गई है कि जल्द बीमारी का पता लगने और स्वास्थ्य देखभाल के ज़रिए ज़िन्दगियों की रक्षा की जा सकती है।
फ़िलहाल 1094 संक्रमण मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 277 लोगों की जान गई है। डॉक्टर टैड्रॉस ने कहा कि यह वायरस अब भी तेज़ी से फैल रहा है। वहीं पड़ोसी देश युगांडा में 20 संक्रमण मामलों की पुष्टि हुई है और 2 लोगों की मौत होने की ख़बर है।
कारगर उपचार के प्रयास
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी अपने साझीदार संगठनो के साथ मिलकर, अगले सप्ताह डीआर कांगो में क्लीनिक परीक्षण की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें दो एंटीवायरल उपायों का उपयोग किया जाएगा: एमबीपी134 और रेमडेसिवियर, जिनसे मृत्यु दर में कमी लाने की उम्मीद है।
WHO प्रमुख ने कहा कि थेरेपी के ज़रिए कहीं अधिक संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसके लिए समुदायों के साथ निरन्तर विमर्श किया जा रहा है और उन्हें परीक्षण प्रक्रिया के बारे में जानकारी भी मुहैया कराई गई है। यदि यह परीक्षण सफल साबित होता है तो प्रभावित समुदायों को जल्द से जल्द यह उपचार पहुंचाने की भी तैयारी है।
कठिन मानवीय हालात
डीआर कांगो के पूर्वी हिस्से में स्थित इतूरी, उत्तर किवू और दक्षिण किवू प्रान्त प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है लेकिन सरकारी सुरक्षाबलों और विद्रोही लड़ाकों के बीच हिंसक टकराव की वजह से यह क्षेत्र हिंसा, विस्थापन व खाद्य असुरक्षा का शिकार रहा है।
फ़िलहाल दवाओं की क़िल्लत के अलावा गम्भीर मानवीय स्थिति की वजह से इबोला पर नियंत्रण पाने के प्रयासों में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर टैड्रॉस ने ज़ोर देकर कहा कि इबोला प्रभावित आबादी तक जल्द से जल्द स्वास्थ्य टीम को रवाना करने और उन्हें मानवीय सहायता मार्ग उपलब्ध कराने के लिए राजनैतिक क़दम उठाए जाने होंगे।
स्वास्थ्यकर्मियों के लिए जोखिम
घातक इबोला वायरस की वजह से स्वास्थ्यकर्मियों को एक बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ रही है। बुधवार को फ़्रांस में एक मेडिकल संगठन के साथ कार्यरत राहतकर्मी के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। वह डीआर कांगो में संक्रमितों की देखभाल करने के बाद देश लौटे थे।
अब तक लगभग 80 स्वास्थ्यकर्मियों के इबोला से संक्रमित होने की सूचना है और यह दर्शाता है कि अग्रिम पंक्ति के राहतकर्मियों के लिए यह कितनी चुनौतीपूर्ण स्थिति है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बचाव उपायों को सख़्ती से लागू करने, जोखिमों के बारे में जानकारी के लिए बेहतर सूचना की व्यवस्था करने और संक्रमण रोकथाम उपायों को अपनाने पर बल दिया गया है।
संगठन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण मामलों के सामने आने के बावजूद फ़िलहाल दुनिया के अन्य हिस्सों में इस बीमारी के फैलने की आशंका अभी कम है।
