UN chief Antonio Guterres : संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का भविष्य कुछ मुट्ठी भर देशों या अरबपतियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित 'AI Impact Summit 2026' को गुरुवार को सम्बोधित करते हुए विकासशील देशों को इन तकनीकों तक बेहतर पहुंच दिलाने के लिए एक वैश्विक AI कोष में योगदान का आहवान भी किया है।
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि एआई का लाभ सभी तक पहुंचाने के लिए कौशल, डेटा क्षमता, सस्ती कम्प्यूटिंग और समावेशी डिजिटल ढांचे का निर्माण ज़रूरी है। उन्होंने आगाह भी किया कि निवेश के बिना कई देश एआई युग से लॉग-आउट हो सकते हैं।
एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, हमारा लक्ष्य 3 अरब डॉलर जुटाना है। यह किसी एक तकनीकी कम्पनी की वार्षिक आय के एक प्रतिशत से भी कम है। सर्वजन के हित में AI के वितरण व विस्तार के लिए एक बहुत छोटी सी क़ीमत।
संयुक्त राष्ट्र की पहल
महसचिव ने बताया कि एआई के सुरक्षित और ज़िम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ठोस क़दम उठा रहा है। उन्होंने पिछले वर्ष महासभा में बनाए गए एआई पर स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल का उल्लेख किया। पिछले सप्ताह नियुक्त 40 वैश्विक विशेषज्ञों का यह पैनल, एआई के जोखिम, अवसर और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन कर प्रमाण जुटाएगा और जानकारी की कमी दूर करने में मदद करेगा।
पैनल का ज़िक्र करते हुए महासचिव ने कहा, एआई सबका होना चाहिए। उन्होंने सदस्य देशों, उद्योग जगत और नागरिक समाज से इस पहल में सहयोग करने की अपील की।
लोगों और पृथ्वी की सुरक्षा के लिए ज़रूरी सुरक्षा उपाय
यूएन महासचिव ने एआई प्रशासन पर वैश्विक संवाद की शुरुआत पर भी ज़ोर दिया, जिसका पहला सत्र जुलाई में होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्पष्ट सुरक्षा रूपरेखा ज़रूरी है जो मानव नियंत्रण, निगरानी और जवाबदेही को बनाए रखे। उन्होंने कहा, हमें ऐसे सुरक्षा उपाय चाहिए जो मानव एजेंसी, मानव निगरानी और मानव जवाबदेही को सुरक्षित रखें।
उन्होंने कहा, एआई, सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। यह चिकित्सा क्षेत्र में खोजों को तेज़ कर सकती है, सीखने के अवसर बढ़ा सकती है। खाद्य सुरक्षा मज़बूत कर सकती है, जलवायु कार्रवाई और आपदा तैयारी को सुदृढ़ कर सकती है और ज़रूरी सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच बेहतर बना सकती है।
आपदाओं की समय पूर्व चेतावनी से बचाव तक, AI का है अहम योगदान
महासचिव ने यह चिन्ता भी जताई कि यदि एआई का विकास बिना नियंत्रण के हुआ, तो इसके नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं, यह असमानता बढ़ा सकता है, पक्षपात को मज़बूत कर सकता है और नुक़सान पहुंचा सकता है।
उन्होंने कहा कि एआई की ऊर्जा और पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए डेटा केन्द्रों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्वच्छ ऊर्जा अपनानी होगी, ताकि लागत का बोझ कमज़ोर समुदायों पर न पड़े।
हमें कामगारों में निवेश करना होगा ताकि एआई मानव क्षमता को बढ़ाए, उसकी जगह न ले। हमें लोगों को शोषण, हेरफेर और दुर्व्यवहार के शिकार होने से बचाना होगा।
महासचिव ने बच्चों की सुरक्षा पर ज़ोर देते हुए कहा, किसी भी बच्चे को अनियंत्रित एआई का परीक्षण विषय नहीं बनने दिया जाना चाहिए। वास्तविक प्रभाव वही तकनीक लाती है जो जीवन बेहतर बनाए और पृथ्वी की रक्षा करे।
अन्त में उन्होंने आह्वान किया, तो आइए, हम, सभी के लिए AI बनाएं, जिसमें गरिमा डिफ़ॉल्ट सेटिंग हो।