सूडान में युद्ध से बदहाल दारफ़ूर क्षेत्र के तवीला शहर में 5 लाख से अधिक विस्थापित लोगों ने शरण ली हुई है, जो लकड़ियों, भूसे और प्लास्टिक शीट से बने अस्थाई झोपड़ियों में रह रहे हैं। इनमें से कुछ परिवारों ने पिछले कई महीनों से बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। सूडान की सशस्त्र सेना और पूर्व में उसके सहयोगी रहे अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर दारफ़ूर की राजधानी अल फ़शर में 18 महीनों की घेराबन्दी के बाद जब RSF लड़ाकों ने अपना अन्तिम धावा बोला तो उसके बाद वहां तीन दिनों के भीतर 6 हज़ार से अधिक लोग मारे गए।
अल फ़शर में हालात बहुत ख़तरनाक हो गए थे। खाना मिल पाना मुश्किल था। स्वास्थ्य केन्द्र, स्कूल तबाह हो गए हैं। हज़ारों लोग वहां से सुरक्षित स्थानों की तलाश में बाहर चले गए। इनमें 17 वर्षीय दोहा भी है, जो अल फ़शर से तीन दिन तक एक गदहा गाड़ी में और पैदल चलने के बाद अपने भाई-बहनों के साथ वहां पहुंची है। बुरी तरह भयभीत और थकी हुई।
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रवक्ता ऐवा हिन्ड्स ने यूएन न्यूज़ को बताया कि दोहा के चेहरे पर इस स्थिति में भी मुस्कान थी और इसलिए उनका ध्यान उस लड़की पर चला गया। वो किसी भी तरह से अंग्रेज़ी में बात करने के लिए लालायित थी। इतनी कठिनाई भरे माहौल में भी किसी को ऐसे देखना मुझे हमेशा प्रभावित करता है।
'हिम्मत नहीं हारी है'
उसका नाम दोहा है, जिसका अरबी भाषा में अर्थ है, सुबह। यूनीसेफ़ प्रवक्ता ने बताया कि उसकी आंखों में चमक, मानो उसके नाम को ही दर्शा रही थी। युद्ध भड़कने से पहले तक दोहा अंग्रेज़ी पढ़ रही थी और तवीला में इस विषय को पढ़ने के अवसरों के बारे में जानना चाहती थी। दोहा ने ऐवा हिन्ड्स को बताया कि वह जीवन में कभी स्वयं भी एक शिक्षक के तौर पर पढ़ाना चाहेगी।
यूनीसेफ़ प्रवक्ता के अनुसार, ऐसे लाखों बच्चे हैं, जिन्हें इन परिस्थितियों में अपने घर अनेक बार छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। केवल 1-2 बार नहीं बल्कि कई बार। ये बच्चे अक्सर देशों की सीमाओं के भीतर विस्थापितों के लिए बनाए गए शिविरों में पहुंचते हैं, जहां जीवन व्यतीत कर पाना बहुत कठिन है। जगह की कमी है और सुरक्षित जल, भोजन व पढ़ाई-लिखाई के अवसरों की कमी है।
उनका आम जनजीवन, मित्रता और सुरक्षा का एहसास पूरी तरह उथल-पुथल का शिकार हो चुका है और वे अब बुनियादी आवश्यकताओं के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
विशाल आवश्यकताएं, घटता समर्थन
संयुक्त राष्ट्र अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर ज़रूरतमन्द आबादी तक स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, मनोसामाजिक समर्थन समेत अन्य सेवाएं पहुंचाने में जुटा है।
मगर सूडान एक विशाल देश है और 3.4 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है। ज़रूरतें निरन्तर बढ़ रही हैं। इसके मद्देनज़र मानवीय सहायता संगठनों के लिए पर्याप्त स्तर पर मदद मुहैया करा पाना कठिन है। हिंसक टकराव वाले इलाक़ों में फंसे बच्चों के लिए हालात विशेष रूप से चिन्ताजनक हैं, जहां उन्हें हिंसा, यौन हिंसा की चपेट में आने समेत अन्य जोखिमों से जूझना पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष द्वारा ज़रूरतमन्द बच्चों की शिनाख़्त की जाती है, सम्भव होने पर उन्हें उनके परिवारों के साथ मिलाया जाता है और आवश्यक हो तो फिर शरण मुहैया कराई जाती है। यूनीसेफ़ के अनुसार, यौन हिंसा से बचाव के लिए यह ज़रूरी है कि बच्चों के लिए सुरक्षित स्थल की व्यवस्था की जाए, विशेष रूप से महिलाओं व लड़कियों के लिए।
यूनीसेफ़ प्रवक्ता ऐवा हिन्ड्स ने क्षोभ जताया कि आवश्यकताएं उछाल पर हैं, जबकि वित्तीय समर्थन में कमी आ रही है। उनके अनुसार यह एक कठिन स्थिति है और दुर्भाग्यवश इसका सर्वाधिक ख़ामियाज़ा बच्चों को ही भुगतना पड़ता है।