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तंबाकू की लत से पाना चाहते हैं छुटकारा, सरकार की इस फ्री हेल्पलाइन से उठाएं फायदा
26 करोड़ से ज्यादा भारतीय हैं इस लत के शिकार, देश में हर साल होती है 13 लाख मौतें
भारत में तंबाकू सेवन की लत से मुक्ति पाने की इच्छा रखने वालो लोगों को नि:शुल्क राष्ट्रीय परामर्श सेवा सही मार्गदर्शन और सहारा दे रही है। यह सेवा विशेषज्ञों की सलाह, नियमित सम्पर्क और कई भारतीय भाषाओं में सहायता के ज़रिए लोगों को तंबाकू सेवन की लत से बाहर आने में मदद करती है।
भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के 28.6 प्रतिशत लोग (यानी लगभग 26 करोड़ 70 लाख लोग) किसी न किसी रूप में तंबाकू का उपयोग करते हैं। तंबाकू में मौजूद निकोटीन की लत जल्दी लगती है, इसलिए बहुत से लोगों के लिए इसे छोड़ना आसान नहीं होता।
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, देश में हर वर्ष तंबाकू उपयोग के कारण लगभग 13 लाख लोगों की मौत होती है। तंबाकू छोड़ने की चाहत रखने वाले लोगों की मदद के लिए मंत्रालय की नि:शुल्क राष्ट्रीय तंबाकू त्याग परामर्श सेवा (1800-112-356) सलाह और सहयोग उपलब्ध कराती है।
इस हेल्पलाइन पर प्रशिक्षित परामर्शदाता, प्रमाण-आधारित सहायता, व्यक्तिगत त्याग योजना और नियमित सम्पर्क के ज़रिए लोगों को तंबाकू की लत से बाहर आने में मदद देते हैं। यह सहायता अंग्रेज़ी, हिन्दी और 15 से अधिक भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।
यह राष्ट्रीय सेवा वर्ष 2016 में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर शुरू की गई थी। यह दिल्ली स्थित वल्लभभाई पटेल वक्ष संस्थान से संचालित होती है। संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून 2016 से अप्रैल 2026 के बीच 6 लाख 50 हज़ार से अधिक लोगों को इस सेवा के ज़रिए सहायता दी गई।
इनमें से 43 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे स्वरोज़गार करते हैं। 75.85 प्रतिशत ने कहा कि उनके परिवार में पहले से तंबाकू उपयोग का कोई इतिहास नहीं था, जबकि 68.63 प्रतिशत लोग धूम्ररहित तंबाकू का उपयोग करते थे। लगातार परामर्श और सहयोग से 34.5 प्रतिशत लोगों को तंबाकू छोड़ने में मदद मिली।
उत्साहजनक नतीजे
मई 2016 से अप्रैल 2024 के बीच इस सेवा पर आए सम्पर्कों के आंकड़े बताते हैं कि युवा वयस्कों में तंबाकू छोड़ने की सफलता दर सबसे अधिक रही। 18 से 24 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 47 प्रतिशत युवजन ने परामर्श के बाद तंबाकू का उपयोग छोड़ दिया।
वर्ष 2018 से यह सेवा तीन क्षेत्रीय केन्द्रों तक बढ़ाई गई है। गुवाहाटी स्थित डॉक्टर भुवनेश्वर बरूआ कैंसर संस्थान, बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान तथा मुम्बई स्थित टाटा स्मारक केन्द्र। इन केन्द्रों पर स्थानीय भाषाओं में भी सहायता दी जाती है।
वल्लभभाई पटेल वक्ष संस्थान के निदेशक डॉक्टर राज कुमार कहते हैं, भारत की तंबाकू त्याग परामर्श सेवा, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा है। तंबाकू छोड़ना केवल इच्छाशक्ति पर निर्भर नहीं करता। हमारे विशेषज्ञ लत के मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक कारणों को समझते हैं और लोगों को तलब व वापसी लक्षणों से निपटने के तरीक़े बताते हैं।
तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए डॉक्टर राज कुमार को वर्ष 2019 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के विश्व तंबाकू निषेध दिवस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के MPOWER तंबाकू नियंत्रण उपाय, देशों को तंबाकू के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई करने में मदद देते हैं।
इनमें तंबाकू उपयोग की निगरानी, धूम्रपान-मुक्त क़ानूनों के ज़रिए लोगों की सुरक्षा, तंबाकू छोड़ने में सहायता, चित्रों वाली स्वास्थ्य चेतावनियां और जागरूकता अभियान, तंबाकू विज्ञापनों पर प्रतिबन्ध तथा तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाना शामिल है।
ये उपाय प्रमाणों पर आधारित हैं और WHO के तंबाकू नियंत्रण ढांचा कन्वेंशन से जुड़े हैं। इनके ज़रिए देश तंबाकू की मांग कम कर सकते हैं, लोगों को तंबाकू छोड़ने में अधिक सहायता दे सकते हैं और तंबाकू महामारी को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
आलोचना नहीं, केवल सहारा
इस सेवा से सम्पर्क करना पूरी तरह स्वैच्छिक है। यह एक व्यवस्थित तंबाकू त्याग योजना के तहत काम करती है। तंबाकू उपयोग करने वाले लोग प्रशिक्षित परामर्शदाताओं से बात करते हैं, जो पहले उनका पंजीकरण एवं आकलन करते हैं, फिर उन्हें चरणबद्ध तरीक़े से तंबाकू छोड़ने में मदद देते हैं।
इस प्रक्रिया में परामर्शदाता व्यक्ति से तंबाकू उपयोग के बारे में पूछते हैं, उसे छोड़ने की सलाह देते हैं, उसकी तैयारी को समझते हैं, सहायता उपलब्ध कराते हैं और आगे के संपर्क की व्यवस्था करते हैं।
वे व्यक्ति के जीवन से जुड़े कारणों, तंबाकू के जोखिमों, छोड़ने के लाभों, रास्ते में आने वाली बाधाओं और बार-बार प्रोत्साहन देने पर भी ध्यान देते हैं। साथ ही वे लोगों को यह समझने में मदद करते हैं कि किन स्थितियों में उन्हें तंबाकू की तलब होती है, तंबाकू से क्या नुक़सान होता है और तलब से निपटने के लिए कौनसे तरीक़े अपनाए जा सकते हैं।
WHO द्वारा सुझाए गए तरीक़ों के अनुरूप, परामर्शदाता लोगों के साथ मिलकर तंबाकू छोड़ने की तारीख़ तय करते हैं। इसके बाद छोड़ने से पहले, छोड़ने के बाद और आगे भी नियमित सम्पर्क किया जाता है, ताकि व्यक्ति फिर से तंबाकू उपयोग की ओर नहीं लौटे।
दुनियाभर में तंबाकू सेवन से सम्बन्धित बीमारियों के कारण, हर साल लगभग 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है। फ़ोन आधारित यह सहायता, सुविधाजनक, किफ़ायती और बड़े पैमाने पर उपयोगी है। लोग कहीं से भी सलाह व सहयोग के लिए सम्पर्क कर सकते हैं और उन्हें यात्रा करने की ज़रूरत नहीं होती। आंशिक गोपनीयता वाला यह तरीक़ा, लोगों को खुलकर बात करने और व्यवस्थित सहायता पाने में मदद देता है।
दिल्ली स्थित वल्लभभाई पटेल वक्ष संस्थान के परामर्शदाताओं ने ऐसे कई प्रेरक उदाहरण देखे हैं, जिनमें लोगों ने इस सेवा की मदद से तंबाकू छोड़ दिया। परामर्शदाता हिमानी (पहचान सुरक्षित रखने के लिए नाम बदला गया है) का कहना है, काम का दबाव, पारिवारिक समस्याएं, घबराहट, समाज में घुलने-मिलने का दबाव या यह ग़लत धारणा कि तंबाकू उपयोग अच्छा या आकर्षक लगता है, ये सब कई युवजन और वयस्कों को तंबाकू की ओर ले जाते हैं।
तात्कालिक लाभ
तंबाकू छोड़ने के लाभ लगभग तुरन्त दिखाई देने लगते हैं। धूम्रपान छोड़ने के 20 मिनट के भीतर हृदय गति और रक्तचाप कम होने लगते हैं। 12 घंटे बाद रक्त में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर सामान्य होने लगता है। दो से 12 सप्ताह के भीतर रक्त संचार और फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होने लगती है। एक से नौ महीनों में खांसी व सांस फूलने की समस्या कम हो सकती है।
एक वर्ष बाद हृदय रोग का जोखिम आधा हो जाता है। पांच वर्ष बाद आघात का जोखिम धूम्रपान नहीं करने वाले व्यक्ति के बराबर हो सकता है। 10 वर्ष बाद फेफड़े, मुंह, गला, भोजन नली, मूत्राशय, गर्भाशय ग्रीवा और अग्न्याशय के कैंसर का जोखिम कम हो जाता है। 15 वर्ष बाद हृदय रोग का जोखिम धूम्रपान नहीं करने वाले व्यक्ति के समान हो जाता है।
सन्देश स्पष्ट है- तंबाकू छोड़ना कठिन हो सकता है, लेकिन इसके लिए अकेले संघर्ष करने की ज़रूरत नहीं है। तंबाकू सेवन से मुक्ति चाहने वाले लोग या उनकी मदद कर रहे (परिवारजन, मित्र और सहकर्मी पेशेवर) सहायता के लिए 1800-112-356 पर संपर्क कर सकते हैं।
