सर्वार्थ सिद्धि योग में 13 सितंबर को महिलाएं करेंगी सौभाग्यदायी हरतालिका तीज का व्रत
त्योहारों का श्रीगणेश होने वाला है। बाज़ारों में बढ़ती रौनक को देखकर लगता है कि बाज़ार परवान चढ़ने वाला है। लोगों में संशय है कि हरतालिका तीज का व्रत 13 या 14 सितंबर कब रखें। ऐसे में ज्योतिर्विद डॉ. पं. सोमेश्वर जोशी ने बताया कि संशय की स्थिति में धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे ग्रंथों में सभी धर्म-सिद्धांत दिए गए हैं, ताकि हम यह स्पष्ट निर्णय ले सकें कि व्रत किस दिन और कब करना चाहिए। संशय की स्थिति में प्रामाणिक तर्कों की संख्या देखी जाती है।
1. पहली बात जो सभी धर्मग्रंथों में लिखी है- 'भाद्रपदशुक्लतृतीयां हरितालिकाव्रतम्'। जब चतुर्थी सोमवार को ही है, तो निर्णय स्पष्ट हो गया कि तृतीया कब मनाएंगे? रविवार को।
2. दूसरी बात, यदि दोनों दिन समान तिथिमान हो, तो यह देखा जाता है कि 'पूर्वा' ग्राह्य है या 'परा'। निर्णयसिंधु के अनुसार 'चतुर्थीयुता' (चतुर्थी से युक्त तृतीया) ही ग्राह्य है।
3. तीसरा सबसे महत्वपूर्ण निर्णायक तथ्य, जो हरतालिका व्रत कथा में भी आता है, वह है— 'हस्ता नक्षत्र प्रशस्तं' (हस्त नक्षत्र श्रेष्ठ है)। हस्त नक्षत्र रविवार को दोपहर 1:07 बजे तक ही है। अतः 'भविष्योत्तर पुराण' के अनुसार, तृतीया तिथि हस्त नक्षत्र से संयुक्त होकर रविवार को आ रही है, जिससे सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। इसलिए हरतालिका व्रत रविवार को ही किया जाएगा।
उपरोक्त तर्कों के साथ राष्ट्रीय विप्र परिषद के संचालक पं. गोविंद नागदा ने कहा कि धर्मशास्त्रों के प्रमाणों के आधार पर सर्वसम्मति से हरतालिका तीज 13 सितंबर (रविवार) को सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी।

