सम्बंधित जानकारी
- DMK-AIADMK गठबंधन की अटकलों के बीच TVK का बड़ा ऐलान, 107 विधायक इस्तीफे को तैयार
- चेन्नई में सियासी हलचल: विजय पहुंचे राजभवन, राज्यपाल के कड़े रुख ने बढ़ाई टेंशन; बहुमत के आंकड़े पर फंसा पेंच
- क्यों टल गया थलापति विजय का शपथ ग्रहण समारोह, कब लेंगे सीएम पद की शपथ?
- तमिलनाडु में AIADMK में बवाल, विजय के समर्थन में पलानीसामी के 30 विधायक?
- Thalapathy Vijay : तमिलनाडु में TVK की ऐतिहासिक जीत के बाद सरकार गठन की तैयारी, विजय जल्द ले सकते हैं मुख्यमंत्री पद की शपथ
तमिलनाडु में बड़ा सियासी गेम, DMK की शर्त ने बढ़ाई ADMK की उलझन, TVK को छोटे दलों से उम्मीद
तमिलनाडु में टीवीके नेता विजय को राज्यपाल 2 बार बहुमत साबित करने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने से इनकार कर चुके हैं। इधर टीवीके विधायक भी डीएमके और एडीआईएमके के बीच गठबंधन की खबरों से परेशान है। हालांकि दोनों दलों में एक मामले में फिलहाल पेंच उलझा हुआ है। विजय की टीवीके को फिलहाल छोटे दलों से काफी उम्मीदें हैं। बहरहाल यह देखना दिलचस्प है कि तमिलनाडु के सियासी खेल में किसकी सरकार बनेगी? ALSO READ: DMK-AIADMK गठबंधन की अटकलों के बीच TVK का बड़ा ऐलान, 107 विधायक इस्तीफे को तैयार
नंबर गेम किसके साथ?
गौरतलब है कि टीवीके 108 सीटों जीतकर तमिलनाडु में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। डीएमके 59 और एडीएमके 47 सीटे जीतकर दूसरे और तीसरे नंबर पर है। कांग्रेस के पास 5 और पीएमके के 4 विधायक हैं। आईयूएमएल, सीपीआई, सीपीआईएम और वीसीके के पास 2-2 विधायक हैं। भाजपा, डीएमडीके और एएमएमकेएमएनकेजेड के पास 1-1 विधायक है। कांग्रेस टीवीके को समर्थन का एलान कर चुकी है और विजय की पार्टी सत्ता से मात्र 6 सीटें दूर है। ऐसे में सभी की नजरें छोटे दलों पर है।
क्या है डीएमके की शर्त?
तमिलनाडु की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले डीएमके और एडीएमके के विजय को सत्ता में आने से रोकने के लिए एक साथ आने को तैयार है। हालांकि डीएमके ने एडीएमके से साफ कहा है कि अगर आप हमारे साथ आना चाहते हैं तो आपको भाजपा से गठबंधन तोड़ना होगा। इधर पलानीसामी की पार्टी भाजपा का साथ छोड़ने को तैयार नहीं है।
स्टालिन की पार्टी की मुश्किल
तमिलनाडु की राजनीति में आईयूएमएल, सीपीआई, सीपीआईएम और वीसीके आदि दल डीएमके के साथ रहे हैं। स्टालिन की पार्टी कांग्रेस के विजय को समर्थन से खासी नाराज हैं। वह किसी भी स्थिति में अपने साथी दलों को खोना नहीं चाहती।
क्या है एडीएमके की मुश्किल?
दूसरी ओर एडीएमके भी पार्टी में तोड़फोड़ की विजय की कोशिशों से नाराज हैं। वह हर हाल में टीवीके को सत्ता से दूर रखना चाहती है। डीएमके और उससे जुड़े दल भाजपा से नहीं जुड़ना चाहते इसलिए पलानीसामी की पार्टी पर भाजपा से अलग होने के लिए दबाव बना रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस खेल में किसकी जीत होती है।
edited by : Nrapendra Gutpa
