सम्बंधित जानकारी
- ईरान युद्ध से हिला बाजार : 4 दिन में 2 बार क्रैश, कैसा रहेगा अगला हफ्ता?
- ईरान युद्ध से बाजार में तबाही: सेंसेक्स 1690 अंक गिरा, 8 लाख करोड़ स्वाहा
- Share Bazaar में लगातार दूसरे दिन बड़ी तेजी, Sensex 75270 के पार, Nifty भी 394 अंक उछला
- ट्रंप के बयानों से लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में उछाल, क्या है सेंसेक्स, निफ्टी का हाल?
- ट्रंप के बयान से Share Bazaar में आई बहार, Sensex 74 हजार के पार, Nifty भी 400 अंक उछला
क्रूड 115 डॉलर पार, शेयर बाजार में मुनाफा वसूली, क्या करें निवेशक?
Share Market Crash : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच भीषण जंग की वजह से भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। 11.28 बजे सेंसेक्स 1,191 अंक गिरकर 72,414 और निफ्टी 351 अंकों की गिरावट के साथ 22,468 पर पहुंच गया। बाजार में हर बढ़त के बाद मुनाफावसूली की स्थिति बन रही है। इससे छोटे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। वे दुविधा में है कि बाजार में बने रहें या प्रॉफिट बुकिंग कर लें।
आज सुबह बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। Axis Bank, HDFC Bank, Kotak Bank के शेयर बुरी तरह फिसल गए। सभी ऑटो कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में है।
लाल निशान में दुनियाभर के बाजार
अमेरिका शेयर बाजार में गिरावट के बाद जापान, कोरिया से हांगकांग तक एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मच गया। Japan का निक्केई इंडेक्स 2382 अंक गिरकर 50,566 पर पहुंच गया तो हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी 1.95 फीसदी टूट गया।
क्रूड का हाल भी बेहाल
दुनिया में बढ़ते तेल संकट के बीच ईरान, इजराइल और खाड़ी देशों में ऊर्जा संयंत्रों पर हमले और ट्रंप द्वारा खर्ग द्वीप पर कब्जे संबंधी बयान से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दामों में तेजी आई। अंतरराष्ट्रय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115.1 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। WTI क्रूड भी 100.9 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इंडियन बास्केट में कच्चे तेल की कीमतें 157 डॉलर प्रति बैरल पर है।
क्या करें निवेशक
बाजार विशेषज्ञ मनीष उपाध्याय के अनुसार, फिलहाल बाजार में अनिश्चितता हावी है। इस स्थिति बाजार के प्लस में जाने पर मुनाफावसूली की स्थिति बनती नजर आ रही है। संकट की घड़ी में लोग अपनी पोजिशन हल्की रखना चाहते हैं। तेल संकट, ऊर्जा संयंत्रों पर हमले और ट्रंप के बयानों से निवेशकों में निराशा का माहौल है। मार्केट कहां तक जाएगा इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। ऐसे में छोटे निवेशकों को युद्ध खत्म होने का इंतजार करना चाहिए।
edited by : Nrapendra Gupta
