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3 साल में ब्लू चिप शेयरों ने किया निराश! TCS, Infosys, ITC समेत कई दिग्गजों का रिटर्न कमजोर

blue chip companies return
2026 की पहली छह माही में भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट के चलते कई ब्लू चिप कंपनियों का पिछले 3 साल का रिटर्न करीब शून्य पर पहुंच गया। टीसीएस, आईटीसी, इंफोसिस, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनीलीवर, विप्रो, टाटा मोटर्स और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज कंपनियों के रिटर्न ने निवेशकों को खासा निराश किया। रिलायंस के शेयरों ने जरूर 3.2 फीसदी का रिर्टन दिया।
 

क्या होती है ब्लू चिप कंपनियां?

बड़ी और आर्थिक रूप से बेहद मजबूत और स्थापित कंपनियों के शेयरों को ब्लू चिप (Blue Chip) शेयर कहा जाता है। इनका प्रदर्शन लगातार स्थिर रहता है। इन शेयरों को अक्सर उनके भरोसेमंद रिटर्न के कारण निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। शेयर बाजार में, ब्लू चिप शेयरों को अक्सर छोटी और कम स्थापित कंपनियों की तुलना में कम जोखिम वाला माना जाता है। हालांकि इनमें लाभ की कोई गारंटी नहीं होती और निवेशकों को नुकसान भी हो सकता है।
 
blue chip companies negative return

ब्लू चिप कंपनियों ने क्यों किया निराश?

बाजार विशेषज्ञ योगेश बागौरा ने बताया कि बाजार के दबाव और अस्थिरता के कारण, कई दिग्गज शेयरों का 3 साल का रिटर्न या तो शून्य रहा है या नेगेटिव। ब्लू चिप कंपनियों का प्रदर्शन उनके वैल्यूएशन के हिसाब से नहीं रहा। आईटी कंपनियों के प्रदर्शन में गिरावट की प्रमुख वजह एआई रहा। महंगाई बढ़ने से एफएमसीजी सेक्टर में उम्मीद से कम डिमांड रही तो क्रूड ऑयल महंगा होने से पेंट्स सेक्टर पर बुरा असर पड़ा।
 

क्या है उम्मीद?

बागौरा ने कहा कि बेहतर एसेट क्वालिटी, स्थिर मार्जिन और ब्याज दरों में कमी होने पर इन ब्लू चिप कंपनियों का रिटर्न आने वाले समय में बेहतर हो सकता है। इससे आने वाले दिनों में इन कंपनियों में निवेश का एक बेहतर मौका हो सकता है। 
 
उन्होंने बताया कि भारत और ब्रिटेन के बीच हुए एफटीए का भी इन कंपनियों के प्रदर्शन पर सकारात्मक असर हो सकता है। क्रूड के दाम घटने से भी दूसरी तिमाही को लेकर भारतीय ब्लू चिप कंपनियों पर एफआईआई का भरोसा बढ़ा है।  
 

निवेश के लिए इन बातों का रखें ध्यान

निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति देखें। राजस्व (Revenue), मुनाफा (Profit), कैश फ्लो और कर्ज (Debt) की स्थिति मजबूत होनी चाहिए।
 
लंबे समय का प्रदर्शन जांचें : 5 से 10 वर्षों का रिटर्न, कमाई की वृद्धि और बाजार में स्थिरता देखें।
वैल्यूएशन पर ध्यान दें : अच्छी कंपनी भी बहुत महंगे भाव (High P/E) पर खरीदी जाए तो रिटर्न प्रभावित हो सकता है।
डिविडेंड रिकॉर्ड देखें : जो कंपनियां नियमित डिविडेंड देती हैं, वे अक्सर वित्तीय रूप से मजबूत मानी जाती हैं।
बिजनेस मॉडल समझें : कंपनी का कारोबार टिकाऊ हो और भविष्य में भी उसकी मांग बनी रहने की संभावना हो।
सेक्टर में विविधता रखें : पूरा निवेश केवल आईटी, बैंकिंग या एफएमसीजी जैसे एक ही सेक्टर में न करें।
लंबी अवधि का नजरिया रखें : ब्लू चिप शेयरों से बेहतर रिटर्न आमतौर पर 5-10 साल के निवेश में देखने को मिलता है।
अपने जोखिम और लक्ष्य के अनुसार निवेश करें : निवेश का फैसला अपनी वित्तीय जरूरत, समयावधि और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर करें, न कि केवल दूसरों की सलाह पर।
 
अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।
लेखक के बारे में
नृपेंद्र गुप्ता
नृपेंद्र गुप्ता पिछले 21 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रिंट एवं डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य का अनुभव। वर्तमान में वेबदुनिया की न्यूज टीम में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत हैं।   अनुभव : नृपेंद्र गुप्ता 2 दशक से ज्यादा समय से प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में कार्य.... और पढ़ें