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खिलाड़ी से लेकर कोच तक राणा जी का जवाब नहीं, पिता हैं सैनिक
अमूमन देखा जाता है कि कोई खिलाड़ी अगर मैदान पर अव्वल होता है तो कोचिंग में वह कमाल नहीं दिखा पाता। वहीं बेहतरीन कोच शायद एक औसत खिलाड़ी रहा हो। लेकिन जसपाल राणा एक बेहतरीन खिलाड़ी होने के साथ साथ बेहतरीन कोच भी रहे।उनके पिता नारायण सिंह राणा एक पूर्व सैनिक थे और यह कारण था कि उन्होंने निशानेबाजी का खेल तब चुना जब इसको लेकर भारतीय जनमानस अन्विज्ञ था।
28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा भारत के बेहतरीन पिस्टल शूटर्स में से एक बनकर उभरे और शूटिंग में उनका करियर लगभग दो दशक तक शानदार रहा। उन्होंने पहली बार 1994 में मिलान में 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट में जूनियर वर्ल्ड टाइटल जीतकर दुनिया के सामने अपनी पहचान बनाई।
एशियन गेम्स में उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन 2006 के दोहा गेम्स में रहा, जहां उन्होंने तीन स्वर्ण मेडल जीते और अपने पसंदीदा 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल स्पर्धा में उस समय के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। राणा को 1994 में अर्जुन अवॉर्ड मिला और उन्होंने 1996 के अटलांटा ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें 1997 में भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उन्हें वर्ष 2020 में खेल जगत के सर्वोच्च कोचिंग सम्मान द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
प्रतियोगी निशानेबाजी से संन्यास लेने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग शुरू की और मनु भाकर का करियर संवारने में अहम भूमिका निभाई। 2018 से 2021 के बीच उनके साथ काम करने के बाद, वे पेरिस 2024 ओलंपिक्स से पहले इस स्टार शूटर के साथ फिर से जुड़े। राणा की देखरेख में, भाकर आज़ादी के बाद के दौर में ओलंपिक के एक ही संस्करण में दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।
उन्होंने पेरिस में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल और मिक्स्ड टीम 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में कांस्य पदक जीते। पिछले साल फरवरी में, राणा को 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए भारत का हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया गया था और वे अपने आखिरी दिनों तक शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने के लिए समर्पित रहे।
राणा ने जूनियर राष्ट्रीय टीम कोच और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनर के रूप में भारतीय निशानेबाजी टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कोच के रूप में उनके योगदान में मनु भाकर को प्रशिक्षण देना शामिल है। उनकी देखरेख में मनु भाकर ने 2024 पेरिस ओलंपिक में दो जीते थे।
28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा भारत के बेहतरीन पिस्टल शूटर्स में से एक बनकर उभरे और शूटिंग में उनका करियर लगभग दो दशक तक शानदार रहा। उन्होंने पहली बार 1994 में मिलान में 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट में जूनियर वर्ल्ड टाइटल जीतकर दुनिया के सामने अपनी पहचान बनाई।
12 वर्ष की उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाले राणा भारत के सबसे कामयाब शूटर्स में से एक बने; उन्होंने 1994 से 2006 के बीच चार कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक जीते, जिनमें नौ स्वर्ण पदक शामिल थे। उनकी सफलता एशियन गेम्स में भी जारी रही, जहां उन्होंने 1994 से 2006 के बीच आठ पदक जीते, जिनमें से चार स्वर्ण थे।Indian shooting loses a giant.
— The Better India (@thebetterindia) June 12, 2026
Jaspal Rana, Arjuna Awardee, Padma Shri and Dronacharya Award recipient, has passed away at 49.
A name that once defined Indian shooting between 1990 and 2006, he didnt just win medals, he dominated.
With 15 Commonwealth Games medals and… pic.twitter.com/xhiyJmtxSV
एशियन गेम्स में उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन 2006 के दोहा गेम्स में रहा, जहां उन्होंने तीन स्वर्ण मेडल जीते और अपने पसंदीदा 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल स्पर्धा में उस समय के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। राणा को 1994 में अर्जुन अवॉर्ड मिला और उन्होंने 1996 के अटलांटा ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें 1997 में भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उन्हें वर्ष 2020 में खेल जगत के सर्वोच्च कोचिंग सम्मान द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
प्रतियोगी निशानेबाजी से संन्यास लेने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग शुरू की और मनु भाकर का करियर संवारने में अहम भूमिका निभाई। 2018 से 2021 के बीच उनके साथ काम करने के बाद, वे पेरिस 2024 ओलंपिक्स से पहले इस स्टार शूटर के साथ फिर से जुड़े। राणा की देखरेख में, भाकर आज़ादी के बाद के दौर में ओलंपिक के एक ही संस्करण में दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।
राणा ने जूनियर राष्ट्रीय टीम कोच और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनर के रूप में भारतीय निशानेबाजी टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कोच के रूप में उनके योगदान में मनु भाकर को प्रशिक्षण देना शामिल है। उनकी देखरेख में मनु भाकर ने 2024 पेरिस ओलंपिक में दो जीते थे।
