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जहां हुआ था गणेशजी का जन्म, जानिए 8 रहस्य

रविवार,जून 13, 2021
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पुराणों अनुसार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र:- मन से मारिचि, नेत्र से अत्रि, मुख से अंगिरस, कान से पुलस्त्य, नाभि से पुलह, हाथ से कृतु, त्वचा से भृगु, प्राण से वशिष्ठ, अंगुष्ठ से दक्ष, छाया से कंदर्भ, गोद से नारद, इच्छा से सनक, सनन्दन, सनातन, सनतकुमार, ...
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पुराणों अनुसार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र:- मन से मारिचि, नेत्र से अत्रि, मुख से अंगिरस, कान से पुलस्त्य, नाभि से पुलह, हाथ से कृतु, त्वचा से भृगु, प्राण से वशिष्ठ, अंगुषठ से दक्ष, छाया से कंदर्भ, गोद से नारद, इच्छा से सनक, सनन्दन, सनातन, सनतकुमार, ...
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हिन्दू माह के अनुसार नारद जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्‍ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। अंग्रेजी माह के अनुसार इस पर 27 मई 2021 गुरुवार को यह जयंती मनाई जाएगी। आओ जानते हैं कि नारदजी का जन्म कैसे हुआ था।
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योगी नरहरिनाथजी के अनुसार, महायोगी गोरक्षनाथ का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि और वार मंगलवार को हुआ था। अंग्रेजी माह के अनुसार इस बार यह जयंती 26 मई 2021 बुधवार को मनाई जाएगी। शैव संप्रदाय के अंतर्गत ही शाक्त, नाथ और संत संप्रदाय आते हैं। उन्हीं ...
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पुराण अनुसार मुख्यत: पितरों को दो श्रेणियों में रखा जा सकता है- दिव्य पितर और मनुष्य पितर। दिव्य पितर उस जमात का नाम है, जो जीवधारियों के कर्मों को देखकर मृत्यु के बाद उसे क्या गति दी जाए, इसका निर्णय करता है। इस जमात का प्रधान यमराज है। यमराज की ...
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भगवान चित्रगुप्त को भगवान यमराज के साथ बताया जाता है। भगवान चित्रगुप्त की कार्तिक शुक्ल द्वितीया अर्थात भाईदूज के दिन पूजा करते हैं। भाईदूज के दिन कलम, स्याही, पुस्तक, बहिखाता आदि की पूजा करते हैं। वैशाख शुक्ल षष्ठी को उनका प्रकटोत्सव मनाया जाता है। ...
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आदि शंकराचार्यजी और गुरु गोरखनाथजी ने हिन्दू सनातन धर्म को फिर से सुगठित किया था। आदि शंकराचार्यजी ने बहुत कम उम्र में ही बहुत बड़ा कार्य किया था। उनके बारे में कुछ लोगों ने बहुत ज्यादा भ्रम फैला रखा है और कई लोग उनके बारे में कम ही जानते हैं। आओ ...
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प्रजापति कश्यप की पत्नी विनता के दो पुत्र हुए- गरूड़ और अरुण। गरूड़जी विष्णु की शरण में चले गए और अरुणजी सूर्य के सारथी हुए। सम्पाती और जटायु इन्हीं अरुण के पुत्र थे। आओ जानते हैं संपाती के बारे में पौराणिक तथ्‍य।
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हम जिस इन्द्र की बात कर रहे हैं वह अदिति पुत्र और शचि के पति देवराज हैं। उनसे पहले पांच इन्द्र और हो चुके हैं। इन इन्द्र को सुरेश, सुरेन्द्र, देवेन्द्र, देवेश, शचीपति, वासव, सुरपति, शक्र, पुरंदर भी कहा जाता है। क्रमश: 14 इन्द्र हो चुके हैं:- यज्न, ...
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भारत में कई महान वैज्ञानिक हुए जैसे कणाद ऋषि, भारद्वाज ऋषि, बौधायन, भास्कराचार्य, वराहमिहिर, पतंजलि, चरक, सुश्रुत, पाणिनी, महर्षि अगस्त्य आदि। इन्हीं में से एक थे महान वैज्ञानिक नागार्जुन। महान रसायनशास्त्री नागार्जुन का जन्म संभवत: दूसरी शताब्दी ...
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भारतीय ऋषियों और मुनियों ने ही इस धरती पर धर्म, समाज, नगर, ज्ञान, विज्ञान, खगोल, ज्योतिष, वास्तु, योग आदि ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया था। दुनिया के सभी धर्म और विज्ञान के हर क्षेत्र को भारतीय ऋषियों का ऋणी होना चाहिए। उनके योगदान को याद किया जाना ...
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सहस्रबाहु अर्जुन ने अपने जीवन में यूं तो बहुतों से युद्ध लड़े लेकिन उनमें दो लोग खास थे। पहले रावण और दूसरे परशुराम। रावण से जीत गए और परशुराम से हार गए।
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महर्षि अगस्त्य एक महान ऋषि थे। दक्षिण भारत में उनकी लोकप्रियता अधिक है। उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए थे। ऋषि अगस्त्य के वंशजों को अगस्त्य वंशी कहा गया है। ऋग्वेद में इनका उल्लेख मिलता है। आओ जानते हैं उनके बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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महाराष्ट्र की संत परापंरा में तुकाराम को संत शिरोमणि कहा जाता है। संत नामदेव, संत ज्ञानेश्वर, संत एकनाथ, संत सेन महाराज, संत जानाबाई, संत बहिणाबाई आदि नामों के साथ ही संत तुकाराम का नाम भी लिया जाता है। वारंकरी संप्रदाय में कई संत हुए हैं।
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ऋषि कात्यायन कौन थे, जानिए

गुरुवार,मार्च 25, 2021
कात्यायन नाम से कालांतर में कई ऋषि हुए हैं। एक विश्वामिंत्र के वंश में जिन्होंने श्रोत, गृह्य और प्रतिहार सूत्रों की रचना की थी, दूसरे गोमिलपुत्र थे जिन्होंने 'छंदोपरिशिष्टकर्मप्रदीप' की रचना की थी और तीसरे कात्यायन वररुचि सोमदत्त के पुत्र थे जो ...
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भारत में ऋषि मुनियों की परंपरा वैदिककाल से ही चली आ रही है। उस काल में हजारों ऋषि, मुनि, तपस्वी हुआ करते थे, जो ज्ञान और विज्ञान को प्रकट करते रहते थे। उन्हीं में से एक है कण्व ऋषि। आओ जानते हैं इनके बारे मं संक्षिप्त जानकारी।
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गंधर्वों को देवताओं का साथी माना गया है। गंधर्व विवाह, गंधर्व वेद और गंधर्व संगीत के बारे में आपने सुना ही होगा। एक राजा गंधर्वसेन भी हुए हैं जो विक्रमादित्य के पिता थे। गंधर्व नाम से देश में कई गांव हैं। गांधार और गंधर्वपुरी के बारे में भी आपने ...
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मुख्‍यत: काल भैरव और बटुक भैरव की पूजा का प्रचलन है। श्रीलिंगपुराण 52 भैरवों का जिक्र मिलता है। मुख्य रूप से आठ भैरव माने गए हैं- 1.असितांग भैरव, 2. रुद्र या रूरू भैरव, 3. चण्ड भैरव, 4. क्रोध भैरव, 5. उन्मत्त भैरव, 6. कपाली भैरव, 7. भीषण भैरव और 8. ...
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वैदिक काल में हजारों ऋषि मुनि हुआ करते थे। उन्हीं में से एक थे पुलस्त्य ऋषि। कई लोग इन ऋषि के बारे में बहुत कम ही जानते हैं। आओ जानते हैं कि यह ऋषि कौन थे।
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