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Sankashti Chaturthi 2026: आषाढ़ संकष्टी चतुर्थी पर बन रहा है महासंयोग, जरूर पढ़ें यह पौराणिक व्रत कथा
Ashadh Sankashti Chaturthi Katha: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से जीवन के संकट, बाधाएं और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। भगवान गणेश की कृपा से बुद्धि, विवेक, सफलता और समृद्धि की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से शिक्षा, करियर, व्यापार और पारिवारिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए श्रद्धालु इस दिन पूरे विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करते हैं।ALSO READ: Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?
इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करना माना जाता है। पूजा में भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, लड्डू, लाल पुष्प, सिंदूर और अक्षत अर्पित किए जाते हैं तथा 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जप विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धालु इस दिन संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का श्रवण भी करते हैं, जिससे व्रत का पुण्य और बढ़ जाता है। यहां आपकी सुविधा के लिए प्रस्तुत हैं आषाढ़ संकष्टी चतुर्थी की सरल कथा...
आषाढ़ संकष्टी चतुर्थी की संक्षिप्त कहानी: जब राजा महीजित को मिला पुत्र रत्न
पौराणिक व्रत कथा: यह कथा द्वापर युग की है। महिष्मति नगरी में महीजित नाम का एक बेहद प्रतापी, दयालु और धर्मात्मा राजा राज करता था। वह अपनी प्रजा को अपनी संतान की तरह मानता था। राजा के पास वैभव की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। वेदों के अनुसार संतानहीन जीवन को अधूरा माना गया है, इसी चिंता में राजा धीरे-धीरे बूढ़े होने लगे।
जब प्रजा पहुंची लोमश ऋषि के पास...
राजा की इस चिंता को देखकर उनकी वफादार प्रजा और विद्वान ब्राह्मण उनके लिए उपाय खोजने जंगल की ओर निकल पड़े। जंगल में उन्हें त्रिकालदर्शी लोमश ऋषि के दर्शन हुए। प्रजा ने ऋषि से गुहार लगाई- 'हे मुनिवर! हमारे राजा बहुत धर्मात्मा हैं, उन्होंने कभी किसी का बुरा नहीं किया, फिर भी वे संतानहीन हैं। कृपया कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे उनके वंश की वृद्धि हो।'
ऋषि ने बताया 'संकटनाशन व्रत'
प्रजा की व्याकुलता देखकर लोमश ऋषि ने कहा- 'आप लोग आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी के दिन 'एकदंत गजानन' का व्रत करें। राजा पूरी श्रद्धा से यह व्रत रखें और ब्राह्मणों को भोजन व वस्त्र दान करें। गणेश जी की कृपा से उन्हें निश्चित ही संतान सुख मिलेगा।'
व्रत का चमत्कारी परिणाम
प्रजा ने नगर लौटकर राजा को पूरी बात बताई। राजा महीजित और उनकी पत्नी रानी सुदक्षिणा ने पूरे विधि-विधान से आषाढ़ चतुर्थी का यह चमत्कारी व्रत किया। भगवान गणेश इस भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और कुछ समय बाद रानी ने एक बेहद सुंदर और भाग्यशाली पुत्र को जन्म दिया।
भगवान श्रीकृष्ण के कहे अनुसार जो भी व्यक्ति इस संकष्टी चतुर्थी व्रत को पूरी श्रद्धा से करता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसका घर हमेशा खुशियों से भरा रहता है।
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