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योगी का ऐलान, पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे चोर, 500 साल इंतजार किया 15 दिन और सही

योगी के कार्यक्रम में नजर नहीं आए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, योगी ने कहा- दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा

Yogi adityanath
Yogi Adityanath Ayodhya: राम की नगरी अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। शुक्रवार को खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या की धरती से हुंकार भरते हुए इस पूरे मामले पर अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोषी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह पाताल से भी ढूंढ निकाला जाएगा और उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
 
मुख्‍यमंत्री योगी ने कहा कि राम मंदिर के लिए देश ने 500 साल इंतजार किया है, अब चढ़ावा चोरी की जांच के लिए 15 दिन और सही। एसआईटी (SIT) जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर यह रही कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे से ठीक पहले एक बड़ा अंदरूनी एक्शन देखने को मिला।

योगी के कार्यक्रमों से चंपत राय दूर रखा गया

सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच के बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए गए थे। यही वजह रही कि 245 करोड़ की विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण के इस बड़े सरकारी कार्यक्रम में चंपत राय पूरे समय कहीं नजर नहीं आए। सीएम योगी के इस कड़े रुख से प्रशासनिक और ट्रस्ट के गलियारों में हड़कंप मच गया है। CM योगी ने आम जनता से भी अपील की है कि अगर किसी के पास भी इस महा-चोरी से जुड़ा कोई भी सबूत या साक्ष्य हो, तो वह बिना डरे सीधे SIT को सौंपे। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी कांड, अब सर्विलांस स्टाफ रडार पर! RMO की भी खुलेगी कुंडली

सपा और कांग्रेस पर बरसे योगी

अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री का गुस्सा सिर्फ चोरों पर ही नहीं, बल्कि विपक्ष पर भी जमकर फूटा। समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को आड़े हाथों लेते हुए सीएम योगी ने अतीत के पन्ने पलट दिए। उन्होंने गरजते हुए कहा कि जिन्होंने रामभक्तों पर क्रूरता से गोलियां चलवाई थीं, आज वही लोग हमें उपदेश दे रहे हैं। 
 
उन्होंने कहा कि जो लोग रामभक्तों को अपमानित करते थे और अपराधियों की कब्र पर जाकर फातिहा पढ़ते थे, वे असल में बाबर को मानने वाले लोग हैं। इनकी सोच सिर्फ कब्रिस्तान और उसकी बाउंड्री बनाने तक सीमित थी, जबकि हमारी सरकार अयोध्या का कायाकल्प कर रही है। योगी ने कांग्रेस को भी 'दोगले चरित्र' की पार्टी बताते हुए कहा कि जो कभी राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और कहते थे कि 'राम हैं ही नहीं', आज वे रामभक्तों के नाम पर मचल रहे हैं। ALSO READ: अयोध्या में रामलला को चढ़ाया सबसे महंगा आम, कीमत जानकर चौंक जाएंगे

क्या है यह पूरा मामला?

दरअसल, हाल ही में अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे की रकम/सामग्री में भारी हेराफेरी और चोरी का मामला सामने आया था। चूंकि यह करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा मामला था, इसलिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने इसे लपक लिया और सीधे ट्रस्ट व सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विपक्ष का आरोप था कि रामलला के दरबार में भी भ्रष्टाचार हो रहा है। योगी सरकार का तुरंत बड़ा एक्शन : मामले की संवेदनशीलता और जनता के आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना देर किए इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया।

चंपत राय की अनदेखी क्यों? 

मंदिर की व्यवस्था और दान-दक्षिणा की देखरेख का जिम्मा मुख्य रूप से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का है, जिसके सर्वेसर्वा चंपत राय हैं। जांच के घेरे में मंदिर प्रशासन के लोग भी शामिल हैं। यही वजह है कि निष्पक्ष जांच का संदेश देने के लिए सीएम योगी ने चंपत राय को अपने आधिकारिक कार्यक्रम से दूर रखने का अभूतपूर्व कदम उठाया, जिससे यह साफ हो गया कि सरकार इस मामले में किसी भी तरह का ढुलमुल रवैया बर्दाश्त नहीं करेगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
लेखक के बारे में
संदीप श्रीवास्तव
संदीप श्रीवास्तव करीब 25 वर्ष से ज्यादा समय से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वेबदुनिया के लिए उत्तर प्रदेश में स्ट्रिंगर के रूप में कार्य करते हैं। .... और पढ़ें