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बंगाल में घुसपैठियों पर बड़ा एक्शन, BSF को सौंपी जाएगी सीमा की जमीन, अवैध प्रवासियों की होगी गिरफ्तारी

West Bengal
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को भारत-बांग्लादेश सीमा पर लंबे समय से लंबित फेंसिंग परियोजनाओं के लिए 27 किलोमीटर जमीन सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठियों को राज्य पुलिस गिरफ्तार कर BSF को सौंपेगी। सीमा सुरक्षा कार्यों के लिए जमीन हस्तांतरण का फैसला 11 मई को नबन्ना में हुई राज्य सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया था।
बुधवार शाम नबन्ना में BSF अधिकारियों के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कहा कि सीमा के शुरुआती 27 किलोमीटर हिस्से की जमीन अगले दो सप्ताह के भीतर BSF को सौंप दी जाएगी। उन्होंने इसे राज्य में बड़े सीमा सुरक्षा अभियान की शुरुआत बताया।
 
मुख्यमंत्री ने “घुसपैठियों” को राज्य पुलिस द्वारा सीधे BSF को सौंपने की नई व्यवस्था लागू करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में नहीं आने वाले समुदायों के लोगों को हिरासत में लेकर निर्वासित किया जाएगा। यह प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से लागू होगी। अधिकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार को अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को सीधे BSF को सौंपने का निर्देश दिया था, लेकिन उस आदेश को लागू नहीं किया गया।
 
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार और BSF के बीच नियमित समन्वय के जरिए राज्य और देश दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। पिछली राज्य सरकार ने CAA का विरोध किया था।  निर्वासन की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 दिसंबर 2024 से पहले पश्चिम बंगाल आए और CAA के तहत आने वाले समुदायों के लोगों को परेशान या हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि CAA के तहत 7 समुदायों को शामिल किया गया है। जो लोग इसके दायरे में नहीं आते, वे अवैध घुसपैठिए हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर BSF को सौंपेगी। इसके बाद सीमा रक्षक बल (BGB) से बातचीत कर उन्हें बांग्लादेश वापस भेजा जाएगा। यानी ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ की नीति अपनाई जाएगी।”
 
शुभेंदु अधिकारी ने यह भी बताया कि राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव को इस प्रक्रिया को लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। गृह मंत्रालय ने 2025 में कहा था कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के वे लोग, जो 31 दिसंबर 2024 तक भारत में प्रवेश कर चुके हैं, उन्हें CAA प्रावधानों के तहत सामान्य पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों की अनिवार्यता से छूट दी जाएगी। Edited by : Sudhir Sharma
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