1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. प्रादेशिक
  4. punjab-politics-akal-takht-bhagwant-mann-2027-elections

पंजाब में सियासी भूचाल, अकाल तख्त ने सीएम भगवंत मान को घोषित किया 'गुरु दोषी'

2027 के विधानसभा चुनाव हो सकती है आप की मुश्किल

Bhagwant mann CM Punjab
Bhagwant Mann Akal Takht Punjab: पंजाब की सियासत में सोमवार को उस समय एक अभूतपूर्व मोड़ आ गया, जब सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था 'अकाल तख्त' ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु दोषी' और 'पंथ विरोधी' घोषित कर दिया। अकाल तख्त के इस कड़े फैसले और पूरे सिख समुदाय को मुख्यमंत्री से संबंध तोड़ने के निर्देश के बाद पंजाब का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिखों की इस सबसे प्रभावशाली संस्था के फैसले का सीधा असर 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए सिख मतदाताओं को साधने में बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

वायरल वीडियो बना गले की फांस

यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक वायरल वीडियो से जुड़ा है, जिसमें उन पर सिख भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा है। हालांकि मुख्यमंत्री ने इस वीडियो को 'फेक' बताते हुए कहा था कि इसमें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डीपफेक तकनीक के जरिए छेड़छाड़ की गई है। ALSO READ: पंजाब में AAP को बड़ा झटका, CM भगवंत मान के चाचा और भाई BJP में शामिल
 
दूसरी ओर, अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने बताया कि मुख्यमंत्री को सबूत पेश करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद अकाल तख्त ने भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो फॉरेंसिक लैब से वीडियो की जांच कराई। जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि वीडियो पूरी तरह असली है और इसके साथ कोई तकनीकी छेड़छाड़ नहीं की गई है। हालांकि आम आदमी पार्टी ने इस पर स्टैंड लिया है कि फॉरेंसिक जांच से यह साबित नहीं होता कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान ही हैं। 

अकाल तख्त के सामने पेश होंगे मंत्री और विधायक

इस बीच, धार्मिक विवाद के साथ-साथ 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026' को लेकर भी सरकार और अकाल तख्त के बीच टकराव बढ़ गया है। अकाल तख्त और विभिन्न सिख संगठन इस विधेयक में बेअदबी के खिलाफ बनाए गए कुछ कड़े नियमों और संशोधनों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। अकाल तख्त का आरोप है कि सरकार का यह कानून त्रुटिपूर्ण है। इन आपत्तिजनक नियमों को हटाने के लिए सरकार को 15 दिनों की डेडलाइन दी गई थी। ALSO READ: पंजाब विधानसभा में भगवंत मान पर शराब पीकर आने का आरोप, BJP बोली- लोकतंत्र का अपमान
 
इस विधेयक पर हस्ताक्षर करने वाले पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों और आम आदमी पार्टी के विधायकों को अकाल तख्त ने 29 जून को अपने समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का कड़ा आदेश जारी किया है।

2027 विधानसभा चुनाव पर क्या होगा असर?

पंजाब की राजनीति हमेशा से पंथ और धार्मिक अस्मिता के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले अकाल तख्त का यह फैसला आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपना सकते हैं, जिससे 2027 के चुनावी रण में सत्ताधारी दल को धार्मिक मोर्चे पर कड़ी घेराबंदी का सामना करना पड़ सकता है।
 
उल्लेखनीय है कि पंजाब में विधानसभा की 117 सीटें हैं और इस समय सत्तारूढ़ आप के पास सर्वाधिक 94 सीटें हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस है, जिसके पास 16 सीटें हैं। शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के पास 2-2 विधायक हैं। इसके अलावा बसपा का एक और एक निर्दलीय विधायक है। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
लेखक के बारे में
वेबदुनिया न्यूज़ टीम
वेबदुनिया न्यूज़ डेस्क पर हमारे स्ट्रिंगर्स, विश्वसनीय स्रोतों और अनुभवी पत्रकारों द्वारा तैयार की गई ग्राउंड रिपोर्ट्स, स्पेशल रिपोर्ट्स, साक्षात्कार तथा रीयल-टाइम अपडेट्स को वरिष्ठ संपादकों द्वारा सावधानीपूर्वक जांच-परख कर प्रकाशित किया जाता है।.... और पढ़ें
अगला लेख
Instagram पर 'राजा साहब', हकीकत में पुताईवाला! प्यार की कहानी का ट्विस्ट देखकर पुलिस पर हैरान