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Lakhimpur Kheri Gold Case: पुलिस बोली- बारिश में गले गहने, बंदर ले गए; कोर्ट ने माना लापरवाही

monkey runs away with gold
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 135 किलोमीटर दूर स्थित लखीमपुर खीरी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया। सुनने में यह किसी हास्य फिल्म का दृश्य लग सकता है, लेकिन यह दावा स्वयं पुलिस ने अदालत के समक्ष किया था कि मालखाने में सुरक्षित रखी गई लाखों रुपये मूल्य की सोने की पोटली बारिश में गल गई। इसके बाद आभूषणों को धूप में सुखाने के लिए रखा गया, जहां से बंदरों का एक झुंड उन्हें उठा ले गया। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और शिकायतकर्ता को हुए नुकसान की भरपाई करने का आदेश दिया।
 

वर्ष 2007 से जुड़ा है मामला

मामला वर्ष 2007 का है। दीपावली की रात आभा रानी उर्फ जूली अग्रवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों की टीम ने उनके शरीर से सोने की चेन, लॉकेट, अंगूठी, नाक की कील और 10 चूड़ियां उतारीं, जिन्हें एक पोटली में रखकर सदर कोतवाली के मालखाने में जमा करा दिया गया था।  इसके बाद दहेज हत्या के मुकदमे की लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। अंततः सबूतों के अभाव में सभी आरोपी बरी हो गए। ALSO READ: 1.25 लाख का इनामी लल्लन सिंह एनकाउंटर में ढेर, 7 हत्याओं का आरोपी था बिहार का कुख्यात बदमाश
 

दहेज हत्या मामले से बरी होने के बाद उठी मांग

वर्ष 2024 में मृतका के पति मुदित कुमार अग्रवाल ने जिला एवं सत्र न्यायालय में आवेदन देकर मालखाने में जमा उनकी पत्नी के आभूषण वापस दिलाने की मांग की। जब अदालत ने पुलिस से जवाब तलब किया, तो जो कहानी सामने आई उसने सभी को चौंका दिया।
 

बारिश में भीगे, फिर बंदर उठा ले गए!

कोतवाली पुलिस ने अदालत में वर्ष 2013 की एक जनरल डायरी (जीडी) प्रविष्टि का हवाला देते हुए बताया कि मालखाने में रखी आभूषणों की पोटली बारिश में भीगकर गल गई थी। उसे सुखाने के लिए खुले में रखा गया, जहां बंदरों का एक झुंड आया और पोटली सहित आभूषण उठा ले गया।
 
अदालत ने इस दलील को अविश्वसनीय और अतार्किक बताते हुए अस्वीकार कर दिया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इसे मालखाने में रखी संपत्ति की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही माना।
 

अदालत के सख्त निर्देश

26 जुलाई 2024 को अदालत ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की पहचान की जाए, उनके विरुद्ध विभागीय तथा आपराधिक कार्रवाई की जाए और शिकायतकर्ता को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए। इसके बाद 28 मई 2025 को तत्कालीन हेड मुहर्रिर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया।
 

जांच में सामने आया नया तथ्य

लखीमपुर खीरी की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग के अनुसार जांच में यह स्थापित हुआ कि आभूषण वर्ष 2007 के पोस्टमार्टम से संबंधित पोटली के थे और वे पूर्व हेड मुहर्रिर चंद्रिका प्रसाद तथा रामबख्श पाल के कार्यकाल के दौरान गायब हुए।
 
 हालांकि, जांच पूरी होने से पहले दोनों संबंधित हेड मुहर्रिरों का निधन हो चुका था। ऐसे में उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई संभव नहीं रही। पुलिस ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर मामला बंद कर दिया।
 

अब उच्च न्यायालय का रुख

करीब दो दशक पुराने इस मामले में आज भी शिकायतकर्ता मुदित कुमार अग्रवाल को उनकी पत्नी के आभूषण नहीं मिले हैं। उनके अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौर का कहना है कि अदालत के आदेश के बावजूद न तो संपत्ति वापस मिली और न ही पर्याप्त राहत मिली। इसलिए अब न्याय की उम्मीद में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
 

चर्चा का विषय बना मामला

मालखाने से लाखों रुपये मूल्य के आभूषण गायब होने और उसके लिए बंदरों को जिम्मेदार ठहराने की कहानी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। इससे पहले भी जब्त सामग्री के गायब होने पर पुलिस की ओर से विवादास्पद दलीलें सामने आ चुकी हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा तथा झारखंड के कुछ मामलों में जब्त गांजा अदालत में प्रस्तुत नहीं किया जा सका था और यह तर्क दिया गया था कि उसे चूहे गाजा गटक गए, यानी चूहे भी नशेड़ी होकर लाखों रूपये का नशा कर गये।
 
ऐसे मामलों ने कानून-व्यवस्था और जब्त संपत्ति की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि पुलिस के मालखाने में रखी गई संपत्ति ही सुरक्षित नहीं है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? अदालत की सख्ती के बावजूद वर्षों बाद भी पीड़ित को न्याय और मुआवजा न मिल पाना व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
edited by : Nrapendra Gupta
लेखक के बारे में
हिमा अग्रवाल
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