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तमिलनाडु में भाजपा को बड़ा झटका, अन्नामलाई का इस्तीफा मंजूर

annamalai
Annamalai left BJP : तमिलनाडु में भाजपा को उस समय बड़ा झटका लगा जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शुक्रवार को के. अन्नामलाई का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। फायरब्रांड नेता अन्नामलाई भाजपा से नाराज चल रहे थे। माना जा रहा है कि वे जल्द ही एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन कर सकते हैं।
 
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तमिलनाडु के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया गया इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उन्होंने 2021 से 2025 तक अन्नामलाई ने तमिलनाडु में भाजपा की कमान संभाली। अन्नामलाई को पिछले 5 सालों से तमिलनाडु में बीजेपी का चेहरा माना जा रहा था। उनकी ऊर्जा और संगठन चलाने की क्षमता के विरोधी भी कायल थे। अन्नामलाई को कुछ समय पहले ही प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया था और नैनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी दी थी। 
 
हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा के स्टार प्रचारक रहे अन्नामलाई ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को ही इस्तीफा सौंपा था। गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद माना जा रहा था कि वे अपना फैसला बदल सकते हैं। ALSO READ: तमिलनाडु में BJP के तुरूप के पत्ते का पार्टी से मोहभंग, क्या होगा अन्नामलाई का अगला कदम
 
Annamalai Kuppusamy

अन्नामलाई ने क्यों छोड़ी भाजपा?

कर्नाटक कैडर के पूर्व आईपीएस अन्नामलाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर राजनीति में आए थे। उन्हें पहले तमिलनाडु का उपाध्यक्ष और फिर प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। अन्नामलाई भाजपा के AIADMK के साथ गठबंधन के भी खिलाफ थे। हालांकि, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उन्होंने खुलकर एनडीए के लिए प्रचार किया था। अटकलें ये भी हैं कि अन्नामलाई को दिल्ली में कोई पद दिया जा सकता है। चर्चाएं थीं कि उन्हें आंध्रप्रदेश से राज्यसभा भी भेजा जा सकता है। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ और अन्नामलाई ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया।
 

आखिर क्या थीं अन्नामलाई की शर्तें?

पिछले कई हफ्तों से अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म था। बीजेपी के आंतरिक हलकों से जो छनकर बाहर आ रहा है, उसके मुताबिक अन्नामलाई ने राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने बहुत स्पष्ट संदेश रख दिया था कि उन्हें कम से कम 7 वर्षों के लिए पूरी आज़ादी या पूर्ण स्वायत्तता के साथ राज्य में नेतृत्व का अधिकार मिले। अगर ऐसा नहीं हो सकता, तो उन्हें अपना अलग राजनीतिक रास्ता चुनने की अनुमति दी जाए। ...और संभवत: उन्हें पूर्ण स्वायत्तता नहीं मिली। इसीलिए उन्होंने पार्टी को बाय-बाय बोल दिया। ALSO READ: अन्नामलाई का भाजपा से इस्तीफा, वो 'शर्त' जिसने उड़ाए BJP के होश, तमिलनाडु में खत्म हुआ साथ

क्या भविष्य है अन्नामलाई का?

अगर अन्नामलाई अकेले मैदान में उतरते हैं, तो वे पीएमके (PMK), डीएमडीके (DMDK) और वामपंथियों जैसे स्थापित क्षेत्रीय दलों को कड़ी टक्कर देंगे। विशेषकर पश्चिमी तमिलनाडु के ओबीसी-गौंडर बाहुल्य क्षेत्रों में (जिस समुदाय से वे खुद आते हैं), वे अन्नाद्रमुक (AIADMK) के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकते हैं।
edited by : Nrapendra Gupta
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