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Last Modified: जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़) , बुधवार, 13 मई 2026 (14:47 IST)

जानलेवा तरबूज! मुंबई के बाद अब छत्तीसगढ़ में 15 वर्षीय किशोर की मौत

तरबूज से मौत
गर्मी के सीजन में राहत देने वाला फल 'तरबूज' अब मातम का कारण बनता जा रहा है। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां सुबह का कटा हुआ तरबूज शाम को खाने से एक 15 वर्षीय किशोर की जान चली गई, जबकि तीन अन्य बच्चे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। यह घटना ठीक उसी तरह की है जैसी हाल ही में मुंबई में घटित हुई थी।

सुबह का कटा तरबूत शाम को खाया 

मृतक किशोर की पहचान अखिलेश (15 वर्ष) के रूप में हुई है, जो पोड़ी दल्हा गांव का निवासी था और अपने मामा के घर घुरकोट आया हुआ था। रविवार शाम को बच्चों ने घर में रखा हुआ वह तरबूज खाया जो सुबह काटा गया था। खाने के कुछ घंटों बाद ही अखिलेश को तेज उल्टी, दस्त और सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगी। अखिलेश के साथ-साथ धीवर (4 वर्ष), पिंटू (12 वर्ष) और हितेश (13 वर्ष) की भी तबीयत बिगड़ने लगी। सोमवार को जब इन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक अखिलेश दम तोड़ चुका था। अन्य तीनों बच्चों का इलाज फिलहाल इमरजेंसी वार्ड में जारी है।

क्या हुआ था मुंबई में?

उल्लेखनीय है कि यह मामला कुछ हफ्ते पहले मुंबई में हुई उस घटना की तरह ही नजर आता है, जहां एक ही परिवार के सदस्यों की तरबूज खाने के बाद मौत हो गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि तरबूज में पानी और शुगर की मात्रा अधिक होती है, जिससे गर्मी में कटे हुए फल पर बैक्टीरिया (जैसे साल्मोनेला या ई-कोलाई) बहुत तेजी से पनपते हैं। 
 
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर ने पुष्टि की है कि यह प्रथम दृष्टया फूड पॉइजनिंग का मामला है। अखिलेश के शव का पोस्टमॉर्टम कर विसरा सुरक्षित रखा गया है। घटनास्थल से तरबूज के नमूने लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग को लैब टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में कटे हुए फल, विशेषकर तरबूज और खरबूजा खुले में नहीं रखना चाहिए। इन्हें काटने के 20-30 मिनट के भीतर ही खा लेना चाहिए। यदि फ्रिज में रखना हो, तो एयरटाइट कंटेनर का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही यदि फल खाने के बाद पेट दर्द, जी मिचलाना या सांस लेने में दिक्कत हो, तो घरेलू उपचार के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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