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Last Updated : शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 (18:41 IST)

What is zombie drug : आखिर क्या है भारत में जॉम्बी वायरस का सच, युवाओं के वायरल वीडियोज से मचा हड़कंप

A high-value U.S. surveillance drone
बेंगलुरु की एक सड़क पर लंबे समय तक एक ही जगह खड़े व्यक्ति का वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। इसके बाद लोगों में चिंता और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई पोस्ट में दावा किया गया कि यह शहर में खतरनाक 'जॉम्बी ड्रग' के पहुंचने का संकेत है। वायरल पोस्ट में कहा गया था कि 'जॉम्बी ड्रग' (ज़ायलाजीन मिश्रित पदार्थ) लोगों को बेहोशी जैसी हालत में डाल देता है और बेंगलुरु के बागलूर इलाके में इसके मामले सामने आ रहे हैं। पोस्ट में पैरेंट्‍स, युवाओं और पुलिस को सतर्क रहने की चेतावनी भी दी गई थी। 
हालांकि बढ़ती अटकलों के बीच बेंगलुरू सिटी पुलिस ने मामले की जांच की और सच्चाई सामने रखी। पुलिस द्वारा जारी प्रेस ब्रीफ में बताया गया कि मेडिकल रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के नशीले या साइकोट्रॉपिक पदार्थ के सेवन के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस के अनुसार, संबंधित व्यक्ति गठिया (आर्थराइटिस) से पीड़ित है और उसने डॉक्टर द्वारा दी गई दर्द निवारक दवा के साथ शराब का सेवन किया था, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और वह वीडियो में असामान्य स्थिति में दिखाई दिया।ALSO READ: Strait Of Hormuz पर जहाजों से 20 लाख डॉलर की वसूली, क्या भारत भी दे रहा टोल, आगे क्या है ईरान का प्लान
जांच में यह भी सामने आया कि वह व्यक्ति काम की तलाश में बेंगलुरु आया था और पिछले तीन महीनों से वहीं रह रहा था। पुलिस को किसी ड्रग नेटवर्क या नशे के दुरुपयोग का कोई सबूत नहीं मिला है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि के ऐसी भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न करें। फिलहाल जांच जारी है, लेकिन इस घटना से किसी बड़े खतरे के संकेत नहीं मिले हैं।

 क्या है 'जॉम्बी ड्रग'? 

 
रिपोर्ट्स के मुताबिक 'जॉम्बी ड्रग' शब्द का इस्तेमाल अक्सर ज़ायलाजीन (Xylazine) के लिए किया जाता है, जो पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाली एक सिडेटिव दवा है और इंसानों के लिए नहीं बनी है। कुछ देशों में इसे अवैध ड्रग्स, खासकर फेंटेनिल जैसे ओपिओइड्स के साथ मिलाकर उपयोग किया जाता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा होते हैं।
मेडिकल स्टडी के मुताबिक ज़ायलाजीन सांस की गति धीमी कर सकती है, दिल की धड़कन कम कर सकती है और गहरी बेहोशी जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। इसके असर में व्यक्ति लंबे समय तक स्थिर या प्रतिक्रिया रहित दिख सकता है। चूंकि यह ओपिओइड नहीं है, इसलिए सामान्य एंटीडोट जैसे नालोक्सोन इसका पूरा असर खत्म नहीं कर पाते। Edited by : Sudhir Sharma
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