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बाथरूम में नहाती रह गई 'हसीना' और सब कुछ चुराकर फुर्र हो गया दगाबाज आशिक
आज हम आपको मायानगरी की किसी काल्पनिक रील से दूर, गुजरात के अहमदाबाद की उस तपती सड़क पर ले चल रहे हैं, जहां एक तलाकशुदा हसीना ने नए प्यार के सब्जबाग में खोकर एक अपराध का ऐसा जाल बुना, जिसमें आखिरकार वही फंस गई। यह कहानी है— वासना, लालच, अंधे विश्वास और फिर उस विश्वास के सीने में घोंपे गए धोखे के खंजर की! आइए, खोलते हैं गुनाह और बेवफाई के इस सनसनीखेज मामले की परत दर परत...
हर्षिदा शेट्टी, उम्र का एक ऐसा पड़ाव, जहां जिंदगी का पहला हमसफर साथ छोड़ चुका था। तलाक के बाद सूनी हो चुकी जिंदगी में हर्षिदा को तलाश थी एक अदद सहारे की। वह अहमदाबाद के निकोल इलाके में स्थित एक नामी ज्वेलरी शोरूम में सेल्सगर्ल की नौकरी करने लगी। तभी उसकी जिंदगी में एंट्री होती है मयूर माली की। मयूर शादीशुदा था, लेकिन उसकी जुबान पर शहद और आंखों में अय्याशी के सपने थे।
मयूर ने चालाकी से हर्षिदा को फंसाया
चालाक मयूर ने हर्षिदा के खालीपन को ताड़ लिया। मयूर ने उसके कानों में फूंक मारी कि इस बंद डिब्बे जैसी नौकरी में क्या रखा है हर्षिदा? कुछ बड़ा करते हैं। फिर मैं अपनी बीवी को तलाक देकर तुमसे शादी कर लूंगा। दूर पहाड़ों में हमारी एक नई दुनिया होगी... हर्षिदा मयूर के इस मायाजाल में इस कदर अंधी हुई कि उसे आगे का कुआं और पीछे की खाई दिखाई ही नहीं दी।
तारीख थी 11 मई। निकोल का वह आलीशान शॉपिंग मॉल दोपहर की चिलचिलाती धूप में सुस्ता रहा था। शोरूम के मालिक दर्शन शाह रोज की तरह अपना लंच करने के लिए केबिन में गए हुए थे। काउंटर पर बस हर्षिदा और एक अन्य कर्मचारी कांजी पटेल थे। हर्षिदा के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। मयूर का चेहरा उसकी आंखों के सामने घूम गया। उसने कांजी पटेल की नजरें बचाईं। हाथों में जो हुनर गहने दिखाने का था, वह पलक झपकते ही 'सफाई' में बदल गया।
ट्रे से सोने की चमचमाती चेनें, हीरों की अंगूठियां, भारी-भरकम लॉकेट और सुहाग का प्रतीक कहे जाने वाले मंगलसूत्र... हर्षिदा ने बेहद शातिर तरीके से एक-एक कर सारे जेवर अपने कपड़ों में छिपा लिए। कुल 1.71 करोड़ रुपए की माया अब उसकी आस्तीन में थी। शाम के करीब 4:30 बज रहे थे। हर्षिदा ने कांजी से कहा, 'मेरी तबीयत ठीक नहीं है, मैं घर जा रही हूँ।' कांजी ने मना किया, लेकिन हर्षिदा के सिर पर तो मयूर के प्यार का भूत सवार था। वह बिना इजाजत भाग खड़ी हुई।
शाम 5 बजे जब एक ग्राहक आया, तो कांजी पटेल ने देखा कि ट्रे से सोने का सिक्का और कई जेवर गायब थे। मालिक दर्शन शाह को खबर दी गई। सीसीटीवी कैमरे की तीसरी आंख जब खंगाली गई, तो सबके होश उड़ गए। सादगी का चोगा ओढ़े हर्षिदा करोड़ों के जेवर पार कर चुकी थी।
पहाड़ों की वादियों में गुनाह का 'हनीमून'
चोरी करने के बाद हर्षिदा सीधे मयूर के पास पहुींची। मयूर की आंखें करोड़ों के जेवर देखकर चमक उठीं। दोनों तुरंत अहमदाबाद से रफूचक्कर हो गए। इसके बाद शुरू हुआ गुनाह और अय्याशी का वो सफर, जिसकी ख्वाहिश में हर्षिदा ने अपना ईमान बेचा था। वे एक राज्य से दूसरे राज्य भागते रहे। आलीशान होटलों के बंद कमरों में, ऊंचे पहाड़ों की ठंडी वादियों में वे चोरी के सोने को कौड़ियों के भाव बेचकर ऐश कर रहे थे। हर्षिदा मयूर की बाहों में खोकर भूल चुकी थी कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। उसे लग रहा था कि उसने अपनी तकदीर खुद लिख दी है। मगर... नियति को कुछ और ही मंजूर था।
नहाते-नहाते लुट गई 'हसीना'
कहते हैं, जो दूसरों का घर उजाड़कर अपना महल बनाना चाहते हैं, उनका महल ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है। इस सत्यकथा का सबसे खौफनाक और नाटकीय मोड़ आना अभी बाकी था। एक दिन दोनों एक अनजान शहर के होटल के कमरे में ठहरे हुए थे। हर्षिदा गुनगुनाते हुए बाथरूम में नहाने चली गई। वह पानी की बूंदों के बीच अपनी शादी और आने वाले कल के हसीन सपने बुन रही थी। लेकिन बाहर, कमरे में मयूर माली का शातिर दिमाग कुछ और ही खेल रहा था। जिस मयूर के लिए उसने करोड़ों की चोरी की, वह मयूर अपनी फितरत दिखा चुका था।
हर्षिदा जब नहाकर बाहर निकली, तो कमरा सुनसान था। मयूर गायब था। उसने पागलों की तरह अलमारी और बैग खंगाले। करोड़ों के जेवर गायब थे! मयूर माली उसे ठेंगा दिखाकर, सारे जेवर समेटकर नौ दो ग्यारह हो चुका था। हर्षिदा के पर्स में बचे रह गए थे तो सिर्फ 18 लाख के कुछ गहने और एक अंतहीन सन्नाटा और धोखा! जिसके लिए दुनिया छोड़ी, वही उसे बीच मझधार में नंगा कर गया था। ठगी गई, बर्बाद हो चुकी हर्षिदा का रो-रोकर बुरा हाल था। अब उसके पास न तो इज्जत बची थी, न दौलत और न ही वो कथित 'प्यार'।
सलाखें, आंसू और पछतावा
आखिरकार, टूट चुकी हर्षिदा ने खुद पुलिस के सामने घुटने टेक दिए और रोते हुए अपनी बर्बादी की यह दास्तान बयां कर दी। मंगलवार को अहमदाबाद की निकोल पुलिस ने इस 'धोखे की शिकार' कलयुगी 'बबली' को अदालत में पेश किया, जहां से उसे 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। हर्षिदा पुलिस की कोठरी में बैठकर अपनी किस्मत और मयूर की बेवफाई पर आंसू बहा रही है। वहीं, पुलिस अब उस 'दिलफेंक और शातिर' मयूर माली की सरगर्मी से तलाश कर रही है, जो पूरी बिसात बिछाकर खुद 'किंग' बन बैठा। लेकिन सवाल वही है— क्या औरत प्यार में वाकई इतनी अंधी हो जाती है कि उसे सही और गलत का फर्क दिखना बंद हो जाता है?
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
