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माता बगलामुखी की पूजा विधि, मंत्र, आरती, चालीसा, कथा और लाभ
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष मां बगलामुखी की जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। मां बगलामुखी, दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें पीतांबरा भी कहा जाता है क्योंकि पीला रंग इन्हें अत्यंत प्रिय है। बगलामुखी माता का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली है। वे पीले वस्त्र धारण करती हैं, पीले आभूषणों से सजी होती हैं, और पीले कमल पर विराजमान होती हैं। उनके चार भुजाएं हैं, जिनमें से एक हाथ में वे गदा धारण करती हैं, दूसरे हाथ में शत्रु की जीभ पकड़ती हैं, और अन्य दो हाथों से वे अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
मंत्र: मां बगलामुखी के कुछ प्रमुख मंत्र इस प्रकार हैं:
• मूल मंत्र: 'ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।'
• बीज मंत्र: 'ह्लीं।'
• बगलामुखी गायत्री मंत्र: 'ॐ बगलामुख्यै च विद्महे स्तम्भिन्यै च धीमहि तन्नो बागला प्रचोदयात।'
।।मां बगलामुखी की आरती।।
जय जय श्री बगलामुखी माता, आरति करहुँ तुम्हारी।
पीत वसन तन पर तव सोहै,कुण्डल की छबि न्यारी॥
कर-कमलों में मुद्गर धारै,अस्तुति करहिं सकल नर-नारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता...।
चम्पक माल गले लहरावे,सुर नर मुनि जय जयति उचारी॥
त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब,भक्ति सदा तव है सुखकारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता...।
पालत हरत सृजत तुम जग को,सब जीवन की हो रखवारी॥
मोह निशा में भ्रमत सकल जन,करहु हृदय महँ, तुम उजियारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता...।
तिमिर नशावहु ज्ञान बढ़ावहु,अम्बे तुमही हो असुरारी॥
सन्तन को सुख देत सदा ही,सब जन की तुम प्राण पियारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता...।
तव चरणन जो ध्यान लगावै,ताको हो सब भव-भयहारी॥
प्रेम सहित जो करहिं आरती,ते नर मोक्षधाम अधिकारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता...।
॥ दोहा ॥
बगलामुखी की आरती,पढ़ै सुनै जो कोय।
विनती कुलपति मिश्र की,सुख-सम्पति सब होय॥
।।अथ श्री बगलामुखी चालीसा।।
।।दोहा।।
नमो महाविधा बरदा, बगलामुखी दयाल।
स्तम्भन क्षण में करे, सुमरित अरिकुल काल।।
नमो नमो पीताम्बरा भवानी, बगलामुखी नमो कल्यानी ।१।
भक्त वत्सला शत्रु नशानी, नमो महाविधा वरदानी ।२।
अमृत सागर बीच तुम्हारा, रत्न जड़ित मणि मंडित प्यारा ।३।
स्वर्ण सिंहासन पर आसीना, पीताम्बर अति दिव्य नवीना ।४।
स्वर्णभूषण सुन्दर धारे, सिर पर चन्द्र मुकुट श्रृंगारे ।५।
तीन नेत्र दो भुजा मृणाला, धारे मुद्गर पाश कराला ।६।
भैरव करे सदा सेवकाई, सिद्ध काम सब विघ्न नसाई ।७।
तुम हताश का निपट सहारा, करे अकिंचन अरिकल धारा ।८।
तुम काली तारा भुवनेशी, त्रिपुर सुन्दरी भैरवी वेशी ।९।
छिन्नभाल धूमा मातंगी, गायत्री तुम बगला रंगी ।१०।
सकल शक्तियाँ तुम में साजें, ह्रीं बीज के बीज बिराजे ।११।
दुष्ट स्तम्भन अरिकुल कीलन, मारण वशीकरण सम्मोहन ।१२।
दुष्टोच्चाटन कारक माता, अरि जिव्हा कीलक सघाता ।१३।
साधक के विपति की त्राता, नमो महामाया प्रख्याता ।१४।
मुद्गर शिला लिये अति भारी, प्रेतासन पर किये सवारी ।१५।
तीन लोक दस दिशा भवानी, बिचरहु तुम हित कल्यानी ।१६।
अरि अरिष्ट सोचे जो जन को, बुध्दि नाशकर कीलक तन को ।१७।
हाथ पांव बाँधहु तुम ताके,हनहु जीभ बिच मुद्गर बाके ।१८।
चोरो का जब संकट आवे, रण में रिपुओं से घिर जावे ।१९।
अनल अनिल बिप्लव घहरावे, वाद विवाद न निर्णय पावे ।२०।
मूठ आदि अभिचारण संकट, राजभीति आपत्ति सन्निकट ।२१।
ध्यान करत सब कष्ट नसावे, भूत प्रेत न बाधा आवे ।२२।
सुमरित राजव्दार बंध जावे, सभा बीच स्तम्भवन छावे ।२३।
नाग सर्प ब्रर्चिश्रकादि भयंकर, खल विहंग भागहिं सब सत्वर ।२४।
सर्व रोग की नाशन हारी, अरिकुल मूलच्चाटन कारी ।२५।
स्त्री पुरुष राज सम्मोहक, नमो नमो पीताम्बर सोहक ।२६।
तुमको सदा कुबेर मनावे, श्री समृद्धि सुयश नित गावें ।२७।
शक्ति शौर्य की तुम्हीं विधाता, दुःख दारिद्र विनाशक माता।२८।
यश ऐश्वर्य सिद्धि की दाता, शत्रु नाशिनी विजय प्रदाता।२९।
पीताम्बरा नमो कल्यानी, नमो माता बगला महारानी ।३०।
जो तुमको सुमरै चितलाई, योग क्षेम से करो सहाई ।३१।
आपत्ति जन की तुरत निवारो, आधि व्याधि संकट सब टारो ।३२।
पूजा विधि नहिं जानत तुम्हरी, अर्थ न आखर करहूँ निहोरी ।३३।
मैं कुपुत्र अति निवल उपाया, हाथ जोड़ शरणागत आया ।३४।
जग में केवल तुम्हीं सहारा, सारे संकट करहुँ निवारा ।३५।
नमो महादेवी हे माता, पीताम्बरा नमो सुखदाता ।३६।
सोम्य रूप धर बनती माता, सुख सम्पत्ति सुयश की दाता ।३७।
रोद्र रूप धर शत्रु संहारो, अरि जिव्हा में मुद्गर मारो ।३८।
नमो महाविधा आगारा, आदि शक्ति सुन्दरी आपारा ।३९।
अरि भंजक विपत्ति की त्राता, दया करो पीताम्बरी माता ।४०।
।।दोहा।।
रिद्धि सिद्धि दाता तुम्हीं, अरि समूल कुल काल।
मेरी सब बाधा हरो, माँ बगले तत्काल।।
मां बगलामुखी की पूजा विधि:
1. स्नान और वस्त्र: प्रातःकाल स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें, क्योंकि पीला रंग मां बगलामुखी को प्रिय है।
2. पूजा स्थल की तैयारी: पूजा स्थल को साफ करें और पीले रंग का आसन बिछाएं। मां बगलामुखी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
3. संकल्प: पूजा का संकल्प लें।
4. आवाहन: मां बगलामुखी का आह्वान करें।
5. स्थापना: उनकी प्रतिमा को स्थापित करें।
6. अभिषेक: यदि संभव हो तो जल और पंचामृत से अभिषेक करें।
7. वस्त्र और आभूषण: मां को पीले वस्त्र और पीले रंग के आभूषण अर्पित करें।
8. पुष्प और माला: पीले फूल और हल्दी की माला अर्पित करें।
9. धूप और दीप: धूप और दीप जलाएं।
10. नैवेद्य: पीले फल, पीले रंग की मिठाई और चने की दाल का भोग लगाएं।
11. हल्दी का तिलक: मां को हल्दी का तिलक लगाएं और स्वयं भी लगाएं।
12. मंत्र जाप: मां बगलामुखी के मंत्रों का जाप करें।
13. कथा श्रवण: बगलामुखी जयंती की कथा सुनें।
14. आरती: मां बगलामुखी की आरती करें।
15. प्रसाद वितरण: पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें।
मां बगलामुखी की पौराणिक कथा:
एक समय की बात है, एक राक्षस ने देवताओं को पराजित करके स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवतागण भयभीत होकर मां दुर्गा की शरण में गए। मां दुर्गा ने बगलामुखी का रूप धारण करके राक्षस का वध किया और देवताओं को उनका राज्य वापस दिलाया। धार्मिक मान्यतानुसार श्री कृष्ण और अर्जुन ने भी महाभारत युद्ध के पूर्व माता बगलामुखी की पूजा-अर्चना और साधना की थी।
मां बगलामुखी की पूजा का लाभ:
बुराई पर अच्छाई की विजय: मान्यता है कि इसी दिन मां बगलामुखी प्रकट हुई थीं और उन्होंने पृथ्वी को विनाशकारी शक्तियों से बचाया था। इसलिए यह दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
शत्रुओं पर विजय: मां बगलामुखी को शत्रुओं का नाश करने वाली देवी माना जाता है। उनकी पूजा से भक्तों को शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।
कानूनी मामलों में सफलता: देवी बगलामुखी की आराधना कानूनी विवादों और अदालती मामलों में सफलता दिलाने में सहायक मानी जाती है।
वाक् सिद्धि: मां बगलामुखी की कृपा से वाक् सिद्धि प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति अपनी वाणी से दूसरों को प्रभावित करने में सक्षम होता है।
भय और भ्रम का नाश: उनकी पूजा से भय और भ्रम दूर होते हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है।
