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Last Modified: बुधवार, 13 मई 2026 (17:43 IST)

गुरु प्रदोष व्रत 2026: जानें महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

shivling guru pradosh vrat
15 मई 2026 गुरुवार के दिन गुरु प्रदोष का व्रत रखा जाएगा। जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे 'गुरु प्रदोष' कहा जाता है। शिव और गुरु का यह अद्भुत संयोग आध्यात्मिक उन्नति और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए अचूक माना गया है। यहाँ गुरु प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा की सरल विधि दी गई है।
 
प्रदोष पूजा मुहूर्त- 15 मई शाम 07:04 बजे से रात 09:09 बजे तक।
 

गुरु प्रदोष व्रत का विशेष महत्व

शुभ फल: हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, गुरु प्रदोष का व्रत रखने से जातक को दोहरे शुभ फल प्राप्त होते हैं।
शत्रु विजय: यह व्रत शत्रुओं के विनाश और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए जाना जाता है।
सौभाग्य और समृद्धि: भगवान शिव की कृपा से आर्थिक तंगी दूर होती है और बृहस्पति देव की कृपा से यश, कीर्ति और उच्च पद की प्राप्ति होती है।
पूर्वजों का आशीर्वाद: इस दिन व्रत करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
पुण्य फल: ऐसी मान्यता है कि एक प्रदोष व्रत रखने का पुण्य दो गायों के दान के बराबर होता है।
 

पूजा की सरल एवं सटीक विधि

प्रदोषकाल में पूजा: प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा 'प्रदोष काल' (सूर्यास्त के समय) में की जाती है।
 

1. प्रातः काल की तैयारी

  • सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (संभव हो तो सफेद या पीले) धारण करें।
  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें: "हे शिव शंभू, आज मैं गुरु प्रदोष का व्रत अपनी मनोकामना (नाम लें) की पूर्ति के लिए कर रहा/रही हूँ, इसे स्वीकार करें।"
  • पूरे दिन भगवान शिव के मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जाप करें।
 

2. प्रदोष काल (मुख्य पूजा का समय)

सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है।
पुनः स्नान करें या हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो जाएं।
पूजा घर या मंदिर में उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) की ओर मुख करके बैठें।
 

3. अभिषेक और पूजन

पंचामृत अभिषेक: शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। अंत में गंगाजल या शुद्ध जल चढ़ाएं।
श्रृंगार: शिवजी को चंदन का तिलक लगाएं। बेलपत्र, धतूरा, भांग, मदार के फूल और अक्षत (बिना टूटे चावल) अर्पित करें।
गुरु प्रदोष विशेष: चूंकि यह गुरु प्रदोष है, इसलिए महादेव को पीले फूल और पीला भोग (बेसन के लड्डू या केसरिया खीर) चढ़ाना अत्यंत शुभ होता है।
 

4. पाठ और आरती

प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में घी के दीपक से भोलेनाथ की आरती करें।
 

गुरु प्रदोष के दिन ध्यान रखने योग्य बातें

भोजन: यह व्रत निराहार रखा जाता है, लेकिन यदि सामर्थ्य न हो तो शाम की पूजा के बाद फलाहार (फल, दूध, कूटू का आटा आदि) लिया जा सकता है।
नमक से परहेज: व्रत में साधारण नमक का सेवन न करें, केवल सेंधा नमक ही उपयोग में लाएं।
संयम: इस दिन क्रोध न करें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और घर में शांति का माहौल बनाए रखें।
दान: गुरु प्रदोष के दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को चने की दाल या पीला वस्त्र दान करना विशेष फलदायी होता है।
 
मान्यता है कि जो भक्त पूर्ण श्रद्धा से गुरु प्रदोष का व्रत करते हैं, महादेव उनके जीवन के सभी अंधकारों को मिटाकर उसे ज्ञान और समृद्धि के प्रकाश से भर देते हैं।
लेखक के बारे में
वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
पौराणिक कथा, इतिहास, धर्म और दर्शन के जानकार, अनुभवी ज्योतिष, लेखक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें