1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. तीज त्योहार
  4. adhikmas-bhanu-saptami-2026-date-shubh-muhurat-mahatva-surya-puja
Last Updated : गुरुवार, 4 जून 2026 (18:31 IST)

अधिकमास की भानु सप्तमी 2026 कब है? जानें तिथि, महत्व, शुभ मुहूर्त और सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय

sun surya adhikamas bhanu saptami
adhikamas bhanu saptami 2026: अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में आने वाली भानु सप्तमी का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। जब भी सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे 'भानु सप्तमी' कहा जाता है। चूंकि रविवार और सप्तमी तिथि, दोनों ही सूर्य देव को समर्पित हैं, इसलिए इस दिन का संयोग महापुण्यदायी माना जाता है। अधिक ज्येष्ठ मास में भानु सप्तमी की सही तारीख और इसके महत्व की पूरी जानकारी नीचे दी गई है।
 

अधिकमास भानु सप्तमी की तारीख (2026)

इस साल अधिकमास (17 मई से 15 जून 2026) के दौरान भानु सप्तमी 7 जून 2026, रविवार को मनाई जा रही है।
(विशेष बात यह है कि इसके ठीक दो हफ्ते बाद, यानी 21 जून को सामान्य ज्येष्ठ मास की भी भानु सप्तमी पड़ेगी, लेकिन अधिकमास वाली सप्तमी का महत्व व्रत-अनुष्ठान के लिए विशेष माना गया है)।
 

भानु सप्तमी का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में भानु सप्तमी को सूर्य देव के जन्म दिवस के रूप में भी देखा जाता है। अधिकमास में इसका महत्व कई गुना इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि:

1. आरोग्य और लंबी आयु की प्राप्ति

शास्त्रों में कहा गया है- "आरोग्यं भास्करादिच्छेत्" अर्थात उत्तम स्वास्थ्य की इच्छा सूर्य देव से करनी चाहिए। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से गंभीर शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा (Vitality) का संचार होता है।
 

2. पितृ दोष और ग्रहों की शांति

सूर्य को नवग्रहों का राजा और 'पितृ' का कारक माना गया है। अधिकमास की सप्तमी पर सूर्य देव को जल देने और उनकी पूजा करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है, जिससे मान-सम्मान, नौकरी में तरक्की और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
 

3. अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का दोगुना फल

चूंकि अधिकमास के अधिपति भगवान विष्णु हैं (जो स्वयं सूर्य नारायण का ही स्वरूप हैं), इसलिए इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से भगवान श्रीहरि विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं। इस दिन किए गए दान और तप का फल कभी नष्ट नहीं होता (अक्षय रहता है)।
 

इस दिन क्या उपाय/पूजा करनी चाहिए?

तांबे के पात्र से अर्घ्य: सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत (चावल) और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय "ॐ सूर्याय नमः" या "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का जाप करें।
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ: यदि जीवन में परेशानियां बहुत बढ़ गई हैं या करियर में रुकावट आ रही है, तो इस दिन 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ जरूर करें।
महादान: भानु सप्तमी के दिन तांबे के बर्तन, गेहूं, गुड़, लाल कपड़े या रसीले फलों का दान किसी जरूरतमंद को करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
 
लेखक के बारे में
वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
पौराणिक कथा, इतिहास, धर्म और दर्शन के जानकार, अनुभवी ज्योतिष, लेखक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें