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  4. Worship these 10 Mahavidyas during the Gupt Navratri of the Ashadha month; learn 10 mantras

Gupt Navratri 2026: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि में इन 10 महाविद्याओं की करें पूजा, जानिए 10 मंत्र

An image depicting information about Goddess Durga, the ten supreme powers associated with Gupt Navratri
Ten Mahavidyas Mantra: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि तंत्र, मंत्र और शक्ति साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान आदिशक्ति के दस महाविद्या स्वरूपों की उपासना करने से साधक को आध्यात्मिक उन्नति, आत्मबल, भय से मुक्ति और विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। प्रत्येक महाविद्या का अपना विशिष्ट स्वरूप, महत्व और बीज मंत्र है। श्रद्धा, शुद्धता और गुरु के मार्गदर्शन में इनकी साधना करना सर्वोत्तम माना गया है। यदि आप भी इस गुप्त नवरात्रि अपनी किसी खास मनोकामना को पूरा करना चाहते हैं, तो तिथियों के अनुसार इन 10 देवियों की पूजा और उनके विशेष मंत्रों का जाप जरूर करें।ALSO READ: Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि हो रही है शुरू, 5 गुप्त कार्य करने से होगी मनोकामना पूर्ण
 

आइए यहां जानते हैं आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि की 10 महाविद्या और उनके मंत्र

 

किस दिन होगी किस देवी की साधना?

गुप्त नवरात्रि के 9 दिनों में देवियों की आराधना का एक खास क्रम होता है। आइए जानते हैं किस दिन आपको किस महाशक्ति की पूजा करनी है:
 
पहला दिन: मां काली की साधना
 
दूसरा दिन: मां तारा और मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा
 
तीसरा दिन: मां भुवनेश्वरी की आराधना
 
चौथा दिन: मां छिन्नमस्ता की साधना
 
पांचवां दिन: मां त्रिपुरभैरवी की पूजा
 
छठा दिन: मां धूमावती की आराधना
 
सातवां दिन: मां बगलामुखी की साधना
 
आठवां दिन: मां मातंगी की पूजा
 
नौवां दिन: मां कमला की पूजा
 

जानें 10 महाविद्याएं और उनके अचूक सिद्ध मंत्रALSO READ: Gupt Navratri 2026: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि कब से कब तक रहेगी?

इन दिव्य मंत्रों का जाप शांत मन और पूरी श्रद्धा के साथ करने से आप चमत्कारिक फल पा सकते हैं।
 
काली : ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा:। अथवा ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा। 
 
तारा : ऐं ॐ ह्रीं क्रीं हूं फट्।
 
त्रिपुर सुंदरी : श्री ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं क्रीं कए इल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:।
 
भुवनेश्वरी : ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौ: भुवनेश्वर्ये नम: या ह्रीं।
 
छिन्नमस्ता : श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीयै हूं हूं फट् स्वाहा:।
 
त्रिपुरभैरवी : ह स: हसकरी हसे।'
 
धूमावती : धूं धूं धूमावती ठ: ठ:।
 
बगलामुखी : ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिव्हा कीलय, बुद्धिं विनाश्य ह्लीं ॐ स्वाहा:।
 
मातंगी : श्री ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा:।
 
कमला : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:।
 
जानें गुप्त नवरात्रि की 10 देवियों के नाम- 1. काली, 2. तारा, 3. त्रिपुरसुंदरी, 4. भुवनेश्वरी, 5. छिन्नमस्ता, 6. त्रिपुरभैरवी, 7. धूमावती, 8. बगलामुखी, 9. मातंगी,  10. कमला।

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लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
श्रीमती राजश्री कासलीवाल पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव। धर्म, व्रत-त्योहार, ज्योतिष, रेसिपी, साहित्य, लाइफ स्टाइल और अन्य विषयों पर लेखन का कार्य। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब-एडिटर (कंटेंट) के पद पर कार्यरत हैं।  .... और पढ़ें
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