Mata katyayani: नवरात्रि की षष्ठी की देवी मां कात्यायनी: अर्थ, पूजा विधि, आरती, मंत्र, चालीसा, कथा और लाभ
Maa katyayani: शारदीय या चैत्र नवरात्रि के छठे दिन यानी षष्ठी को माता कात्यायनी की पूजा होती है। इन्हें छठ माता भी कहा जाता है। मां कात्यायिनी की चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है।
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
1. मां कात्यायनी का अर्थ
महर्षि कात्यायन ने भगवती की कठिन तपस्या की थी और इच्छा जताई थी कि मां उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहाँ जन्म लिया, इसलिए उनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा।
2. मां कात्यायनी की पूजा विधि
- मां कात्यायनी की साधना का समय गोधूली काल है।
- अत: गोधूली समय धूप-दीप, गुग्गुल से मां की पूजा करना चाहिए।
- गोधूली वेला के समय पीले अथवा लाल वस्त्र धारण करके मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए।
- इनको पीले फूल और पीला नैवेद्य अर्पित करें।
- मां के समक्ष दीपक जलाएं।
- इसके बाद 3 गांठ हल्दी की भी चढ़ाएं।
- हल्दी की गांठों को अपने पास सुरक्षित रख लें।
- मां कात्यायनी को शहद अर्पित करें।
- अगर ये शहद चांदी के या मिट्टी के पात्र में अर्पित किया जाए तो ज्यादा उत्तम होगा। इससे प्रभाव बढ़ेगा तथा आकर्षण क्षमता में वृद्धि होगी।
- मां को सुगंधित पुष्प अर्पित करने से शीघ्र विवाह के योग बनेंगे साथ ही प्रेम संबंधी बाधाएं भी दूर होंगी।
- इसके बाद मां के समक्ष उनके मंत्रों का जाप करें।
- मां कात्यायिनी देवी का प्रसाद/ भोग- कात्यायनी की साधना एवं भक्ति करने वालों को मां की प्रसन्नता के लिए अमरूद तथा शहद युक्त पान अर्पित करना चाहिए। या फिर शहद का भोग लगाएं।
कात्यायनी देवी का मंत्र:
मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
प्रार्थना:
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
3. मां कात्यायनी की आरती-lyrics
।।माँ कात्यायनी की आरती।।
जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जग की महारानी ।।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा ।।
कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।।
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।।
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की ।।
झूठे मोह से छुड़ानेवाली।
अपना नाम जपानेवाली।।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।।
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी ।।
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।
(समाप्त)
4. मां कात्यायनी व्रत की कथा
कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो। मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसलिए यह देवी कात्यायनी कहलाईं। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। इस देवी की उपासना करने वाले भक्तों के रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस देवी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है। माँ कात्यायनी, देवी दुर्गा के नौ रूपों (नवदुर्गा) में छठी देवी हैं। इनकी पूजा विशेष रूप से नवरात्रि के छठे दिन की जाती है। माँ कात्यायनी को साहस, वीरता और मनोवांछित वर प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।
5. माता कात्यायनी की चालीसा
॥ श्री कात्यायनी चालीसा ॥
।।दोहा।
जय कात्यायनी माँ,
जय महिषासुर मारिणी।
सुर नर मुनि आराधित,
जय मंगल करिणी॥
चौपाई
जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय महिषासुर घातिनी दानी।।
ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी ध्यावैं।
शक्ति शक्ति सब जगत बनावैं॥
रक्तदंतिका और अन्नपूर्णा।
माँ कात्यायनी हैं सम्पूर्णा॥
कात्यायन ऋषि मुनि के आश्रय।
कात्यायनी माँ सबके बासय॥
भय, संकट हरिणी तुही माता।
भक्तों के दुःख हरती आपा॥
जो कोई तेरी शरण में आवे।
मनवांछित फल वह नर पावे॥
ध्यान धार जो कोई नारी।
कात्यायनी पूर्ण सुखकारी।।
कुमारी पुजा जो नित ध्यावें।
अविवाहित जीवन न बितावे॥
हर युग में मां तू सहाय।
जो भी भक्त करे मन लाय॥
।।दोहा।
कात्यानी मां तेरी महिमा।
सतयुमग त्रेता हो या द्वापर।।
सिंह सवारी माँभवानी।
जय-जय-जय अम्बे भवानी॥
॥इति श्री कात्यायनी चालीसा सम्पूर्ण॥
6. मां कात्यायनी की पूजा का लाभ
- इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है।
- भक्तों के रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं।
- जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
- कहा जाता है कि इस देवी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है।
- मां कात्यायनी की पूजा से न केवल विवाह के योग बनते हैं, बल्कि एक सुखी और सफल वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद भी मिलता है।
7. मां कात्यायनी पर पूछे जाने वाले प्रश्न-FAQs
1. माँ का नाम 'कात्यायनी' क्यों पड़ा?
महर्षि कात्यायन ने भगवती की कठिन तपस्या की थी और इच्छा जताई थी कि माँ उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहाँ जन्म लिया, इसलिए उनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा।
2. माँ कात्यायनी का स्वरूप कैसा है?
माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और ज्योतिर्मय है। इनकी चार भुजाएँ हैं:
दाहिनी ओर का ऊपर वाला हाथ 'अभय मुद्रा' में और नीचे वाला 'वरद मुद्रा' में है।
बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में 'तलवार' और नीचे वाले हाथ में 'कमल का फूल' है।
इनका वाहन सिंह (शेर) है।
3. माँ कात्यायनी की पूजा किस दिन की जाती है?
शारदीय और चैत्र नवरात्रि के छठे दिन (षष्ठी तिथि) माँ कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है।
4. शीघ्र विवाह के लिए माँ कात्यायनी की पूजा क्यों प्रसिद्ध है?
ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में ब्रज की गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए यमुना तट पर माँ कात्यायनी की ही पूजा की थी। इसी कारण विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए माँ कात्यायनी का पूजन अचूक माना जाता है।
5. माँ कात्यायनी को कौन सा भोग प्रिय है?
माँ कात्यायनी को शहद (Honey) का भोग बहुत प्रिय है। छठे दिन देवी को शहद अर्पित करने से भक्त की आकर्षण शक्ति बढ़ती है और उसे सुंदर रूप प्राप्त होता है।
6. पूजा में किस रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है?
माँ कात्यायनी की पूजा के दिन लाल या पीला रंग पहनना बहुत शुभ माना जाता है। ये रंग शक्ति और भक्ति के प्रतीक हैं।
7. माँ कात्यायनी का ध्यान मंत्र क्या है?
पूजा के समय इस मंत्र का उच्चारण करना अत्यंत लाभकारी होता है:
चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

