आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पहला दिन: मां काली की पूजा विधि, मंत्र, आरती और 5 चमत्कारी उपाय
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि तंत्र-मंत्र, साधना और विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। सामान्य नवरात्रि की तरह इसमें नौ देवियों के बजाय 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। प्रथम दिन मां काली (या कुछ परंपराओं में मां शैलपुत्री के स्वरूप में तांत्रिक पूजन) की आराधना की जाती है। यहाँ आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिन की पूजा विधि, आरती और 5 अचूक उपाय दिए गए हैं।
दस महाविद्या: काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला।
1. प्रथम दिन की पूजा विधि
प्रथम दिन की देवी: नवदुर्गा की प्रथम देवी मां शैलपुत्री और दस महाविद्या की प्रथम देवी माता कालिका। यहां पर माता कालिका की पूजा विधि और आरती।
गुप्त पूजा: गुप्त नवरात्रि की पूजा को पूरी तरह गोपनीय (गुप्त) रखा जाता है। आपकी साधना के बारे में किसी बाहरी व्यक्ति को पता नहीं चलना चाहिए।
कलश स्थापना व संकल्प: शुभ मुहूर्त में चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ ही कलश की स्थापना करें। हाथ में जल और अक्षत लेकर गुप्त नवरात्रि की साधना का संकल्प लें।
अखंड ज्योति/दीपक: मां के सामने घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं। यदि संभव हो तो अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।
पूजा सामग्री: मां को लाल रंग के पुष्प (विशेषकर गुड़हल या गुलाब), अक्षत, कुमकुम, सिंदूर, धूप, और दीप अर्पित करें।
विशेष भोग: प्रथम दिन मां को लौंग का जोड़ा, बताशा और हलवे का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
मंत्र जाप: एकांत स्थान पर बैठकर लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से इस तांत्रिक मंत्र का जाप करें:-
मंत्र: ॐ क्रीं कालिकायै नमः या ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
2. मां काली की आरती
पूजा के अंत में पूरी श्रद्धा के साथ मां की आरती करें:
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
तेरे भक्त जनों पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिंहों से बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥
मां बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पर करुणा बरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें मां तेरे मन में एक छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥
1. धन लाभ और बरकत के लिए:
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा को स्वच्छ कमल का फूल या गुड़हल का फूल अर्पित करें। इसके बाद नौ दिनों तक रोज एक गुलाब का फूल चढ़ाएं। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है।
2. नौकरी और व्यापार में तरक्की:
पहले दिन एक साफ लाल रेशमी कपड़े में 11 गोमती चक्र और 11 कौड़ियां रखकर मां के चरणों में अर्पित करें। नौ दिनों बाद इन्हें अपनी तिजोरी या कार्यस्थल पर रख दें।
3. नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र बाधा से मुक्ति:
शाम के समय कपूर के ऊपर दो लौंग (साबुत) रखकर जलाएं और पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। इससे घर की सारी नेगेटिविटी खत्म हो जाएगी।
4. शीघ्र विवाह के योग के लिए:
यदि विवाह में अड़चनें आ रही हैं, तो प्रथम दिन मां दुर्गा को शृंगार की सामग्री (मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी आदि) अर्पित करें। इससे वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
5. मनोकामना पूर्ति (सर्वकार्य सिद्धि):
एक साबुत पानी वाला नारियल लें, उस पर कलावा (मौली) बांधें और अपनी मनोकामना कहते हुए उसे मां के चरणों में अर्पित कर दें। नौवें दिन इसे बहते जल में प्रवाहित कर दें।
विशेष नोट: गुप्त नवरात्रि की पूजा में सात्विकता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। इन नौ दिनों में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का पूरी तरह त्याग करें।

