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Last Updated : मंगलवार, 20 जनवरी 2026 (13:36 IST)

माघ मेला विवाद में क्यों घिरे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वानंद? जानिए उमाशंकर से शंकराचार्य बनने तक का सफर

Shankaracharya Avimukteshwaranand Magh Mela controversy
Shankaracharya Avimukteshwaranand Magh Mela controversy: हाल के दिनों में प्रयागराज माघ मेला से जुड़े मामले को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वानंद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। साधु-संतों, प्रशासन और परंपराओं को लेकर उनकी टिप्पणियों ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन हैं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वानंद और कैसे उमाशंकर उपाध्याय से देश के प्रभावशाली धर्माचार्य बने। इस रिपोर्ट में जानते हैं उनके जीवन, विचारधारा और मौजूदा विवाद की पूरी कहानी।
 

क्या है शंकराचार्य से जुड़ा माघ मेला विवाद 

मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य और उनके अनुयायियों ने पालकी में बैठकर संगम में स्नान का प्रयास किया। प्रशासन ने भीड़ और सुरक्षा कारणों से इसे रोक दिया था। पुलिस ने उनसे कहा कि उन्हें पैदल ही आगे बढ़ना चाहिए। रोकते समय कुछ स्थानों पर शंकराचार्य के अनुयायियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और तनाव बढ़ा। शंकराचार्य ने इसे अनुचित रोकथाम और अपमान बताया। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई अपमान नहीं किया गया। केवल भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा तथा नियमों के कारण ऐसा किया गया। 
 
मुझसे गंगा स्नान का मेरा जन्मसिद्ध अधिकार छीना जा रहा है। क्या अब साधु-संतों को गंगा स्नान के लिए भी सरकार से अनुमति लेनी होगी? यह संतों का अपमान है। इस घटना के बाद वे बिना अन्न-जल ग्रहण किए धरने पर बैठ गए थे। इस बीच, प्रशासन ने उन्हें नोटिस भी जारी किया है।
 

विवादों से पुराना नाता

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का विवादों से पुराना नाता रहा है। अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के समय उन्होंने शास्त्र सम्मत विधि का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था- अधूरे मंदिर में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा करना शास्त्रों के विरुद्ध है। जब मंदिर पूरी तरह निर्मित नहीं हुआ, तो उसकी प्रतिष्ठा करना 'उचित नहीं' है। उनका तर्क था कि शिखर के बिना मंदिर का शरीर अधूरा है और ऐसे में वहां देवता की प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने गोरक्षा का मुद्दे भी उठाया था। उन्होंने कहा था- गो माता की रक्षा के लिए हम मर जाएंगे या मार देंगे। आजादी के 75 साल बाद भी गायों का कटना बंद नहीं हुआ, यह हमारे लिए कलंक है। उन्होंने केदारनाथ से जुड़ा मुद्दा भी उठाया था। 
 

उमाशंकर से अविमुक्तेश्वरानंद

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के पट्टी तहसील स्थित ब्राह्मणपुर गांव में जन्मे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का दीक्षा लेने से पहले नाम उमाशंकर उपाध्याय था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 2006 में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद से दीक्षा ली थी। वह ज्योतिष पीठ के 46वें शंकराचार्य हैं।
 
उन्‍होंने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की डिग्री प्राप्त की। उन्‍होंने 1994 में छात्र संघ चुनाव में जीत भी हासिल की थी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक उम्मीदवार का समर्थन भी किया था। वर्ष 2008 में उन्‍होंने गंगा को राष्‍ट्रीय नदी घोषित करने के लिए अनशन किया था।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala