क्या है अमरनाथ हिमलिंग के पिघलने का राज? क्या कहते हैं पर्यावरणविद
Baba Amarnath Yatra : हर बार रक्षा बंधन से पहले ही भक्तों के सांसों की गर्मी से तेजी से पिघलता अमरनाथ यात्रा का प्रतीक हिमलिंग एक बार फिर विवाद का मुद्दा बन चुका है। अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने इसके पिघलने की प्रक्रिया से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया है, पर कश्मीर के पर्यावरणविद इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने की अनुमति देने से ऐसा हुआ है।
पिछले कई सालों से जिस तेजी से हिमलिंग पिघल रहा है उसे रोकने की खातिर किए जाने वाले उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। दरअसल गुफा में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने से हिमलिंग को नुक्सान पहुंच रहा है, क्योंकि लाखों भक्तों की गर्म सांसों को हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है। श्राइन बोर्ड के अधिकारी अप्रत्यक्ष तौर पर भक्तों की सांसों की थ्यूरी को मानते हैं, पर प्रत्यक्ष तौर पर वे इसे कुदरती प्रक्रिया करार देते थे।
श्राइन बोर्ड के अधिकारी कहते थे कि ग्लोबल वार्मिंग भी इसे प्रभावित कर रही है। वे इससे इंकार करते थे कि गुफा में क्षमता से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वर्ष 1996 के अमरनाथ हादसे के बाद नितिन सेनगुप्ता कमेटी को आधार बना सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिदिन 15 हजार से अधिक को यात्रा में शिरकत करने से रोक दिया था पर इस बार तो 8 दिनों में 2 लाख अर्थात प्रतिदिन 25 हजार के हिसाब से श्रद्धालु गुफा में पहुंच चुके हैं।
इस पर पर्यावरणविद खफा हैं। वे कहते हैं कि यात्रियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि न सिर्फ हिमलिंग को पिघलाने में अहम भूमिका निभा रही है, यात्रा मार्ग के पहाड़ों के पर्यावरण को भी जबरदस्त क्षति पहुंचा रही है पर श्राइन बोर्ड श्रद्धालुओं की संख्या को कम करने को राजी नहीं दिखता है।
लेकिन वह हिमलिंग के संरक्षण की योजनाओं पर अमल करने का इच्छुक जरूर दिखता है। श्राइन बोर्ड श्रद्धालुओं की संख्या को कम करने की बजाय यात्रा को सारा साल चलाने के पक्ष में भी समर्थन जुटाने में जुटा हुआ है जिसके लिए अब सड़क तैयार की जा चुकी है तो गंडोला भी लगाने की तैयारी हो रही है।
यात्रा शुरू होने के बाद भक्तों के अलावा गुफा के आसपास बड़ी तादाद में सुरक्षाकर्मी भी मौजूद हैं। भारी भीड़ की वजह से अमरनाथ गुफा के आसपास का तापमान और बहुत बढ़ गया है, हालांकि श्राइन बोर्ड ने दावा किया था कि पिछले दो-तीन साल में उन्होंने कुछ ऐसे उपाय किए हैं, जिससे गुफा का तापमान न बढ़े।
जब 28 जून को बाबा बर्फानी ने पहली बार दर्शन दिए थे तब शिवलिंग का आकार करीब 10 से 12 फुट का था और धीरे-धीरे वह अब पूरी तरह से गायब हो चुका है। ये पहला मौका नहीं है जब बाबा बर्फानी पहली बार अपने भक्तों से रुठे हों, इससे पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है।
कब-कब अंतर्ध्यान हुए हैं बाबा बर्फानी
2013 में 16 फुट से बाबा बर्फानी 7 फुट के ही रह गए।
2012 में शिवलिंग का आकार 22 फुट से घटकर 12 फुट हो गया था।
2011 में 16 फुट के बाबा बर्फानी ने दर्शन दिए थे, जो महज 5 दिनों में 4 फुट तक पिघल गए थे।
2010 में 12 फुट के शिवलिंग का आकार पिघलकर पहले 6 फुट हुआ और बाद में 3 फुट हो गया था।

