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Positive IOD क्या है? कैसे बनता है भारतीय मानसून का 'रक्षक' और El Nino के असर को करता है कमजोर

Positive Indian Ocean Dipole Explained,
Positive Indian Ocean Dipole Explained: हर बार जब प्रशांत महासागर में पैदा होने वाला अल नीनो (El Niño) भारतीय मानसून को कमजोर करने लगता है, तब मौसम वैज्ञानिकों की नजर हिंद महासागर में बनने वाली एक खास मौसमी स्थिति पर टिक जाती है—पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल (Positive Indian Ocean Dipole - IOD)।
 
इसे भारतीय मानसून का "सुरक्षा कवच" या "रक्षक" भी कहा जाता है, क्योंकि कई बार यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर देता है और देश को गंभीर सूखे से बचाने में मदद करता है।

क्या है इंडियन ओशन डिपोल (IOD)?

इंडियन ओशन डिपोल (IOD) हिंद महासागर की एक महत्वपूर्ण महासागरीय और वायुमंडलीय घटना है, जो समुद्र की सतह के तापमान में होने वाले बदलावों से जुड़ी होती है।
 
सरल शब्दों में कहें तो जिस तरह प्रशांत महासागर में तापमान के उतार-चढ़ाव को अल नीनो और ला नीना कहा जाता है, उसी तरह हिंद महासागर में तापमान के असंतुलन को इंडियन ओशन डिपोल (IOD) कहा जाता है।
IOD दो क्षेत्रों के तापमान के अंतर को मापता है:
  • पश्चिमी क्षेत्र (Western Pole) : अफ्रीका के पूर्वी तट, विशेष रूप से सोमालिया और केन्या के आसपास का समुद्री इलाका।
  • पूर्वी क्षेत्र (Eastern Pole) : इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पश्चिम के पास का समुद्री क्षेत्र।
यही तापमान अंतर तय करता है कि IOD पॉजिटिव होगा, निगेटिव होगा या सामान्य स्थिति में रहेगा।
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पॉजिटिव IOD कैसे बनता है?

सामान्य परिस्थितियों में इंडोनेशिया के आसपास का समुद्र अपेक्षाकृत अधिक गर्म रहता है और वहां अधिक बादल तथा वर्षा होती है। लेकिन जब पॉजिटिव IOD विकसित होता है, तो स्थिति उलट जाती है।

क्या होता है इस दौरान?

✔ अफ्रीका के पास पश्चिमी हिंद महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है।
✔ इंडोनेशिया के आसपास पूर्वी हिंद महासागर का पानी अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है।
✔ इस तापमान अंतर के कारण हवाओं और समुद्री परिसंचरण (Ocean Circulation) में बदलाव आता है।
✔ पश्चिमी हिंद महासागर में अधिक वाष्पीकरण होता है, जिससे बड़ी मात्रा में नमी और बादल विकसित होते हैं।
 
यही अतिरिक्त नमी बाद में भारतीय मानसून को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
 

अल नीनो और पॉजिटिव IOD के बीच कैसे होती है 'खींचतान'?

अल नीनो और पॉजिटिव IOD अक्सर मानसून पर विपरीत प्रभाव डालते हैं।
 
अल नीनो का असर : जब अल नीनो सक्रिय होता है:
  • भारतीय मानसून कमजोर पड़ सकता है।
  • मानसूनी हवाओं में नमी कम हो सकती है।
  • बारिश का वितरण असंतुलित हो सकता है।
  • सूखे की संभावना बढ़ जाती है।

पॉजिटिव IOD का जवाब

जब पॉजिटिव IOD सक्रिय होता है

  • हिंद महासागर से अतिरिक्त नमी उपलब्ध होती है।
  • अरब सागर और मध्य भारत की ओर नमी का प्रवाह बढ़ता है।
  • मानसूनी परिसंचरण को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है।
  • बारिश की कमी की भरपाई होने लगती है।
यही कारण है कि मौसम वैज्ञानिक पॉजिटिव IOD को कई बार "अल नीनो काउंटर" के रूप में देखते हैं।
 

भारतीय मानसून पर इसका क्या असर पड़ता है?

यदि मानसून के मध्य या अंतिम चरण में पॉजिटिव IOD मजबूत हो जाए, तो इसके कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
1. बारिश में तेजी : जून और जुलाई में कमजोर मानसून के बाद अगस्त और सितंबर में बारिश की गतिविधियां अचानक बढ़ सकती हैं।
2. सूखे का खतरा कम : कम वर्षा वाले क्षेत्रों को अतिरिक्त बारिश मिल सकती है, जिससे सूखे की आशंका घट जाती है।
3. जलाशयों को राहत : बांधों, जलाशयों और भूजल स्तर में सुधार हो सकता है।
4. कृषि को फायदा : खरीफ फसलों को आवश्यक नमी मिलती है और रबी फसलों की तैयारी के लिए मिट्टी में पर्याप्त जल उपलब्ध रहता है।
5. मानसून की विदाई में देरी : कई बार पॉजिटिव IOD के कारण मानसून सामान्य से कुछ देर तक सक्रिय रह सकता है।
 

2019: जब पॉजिटिव IOD ने बदल दी तस्वीर

पॉजिटिव IOD का सबसे चर्चित उदाहरण वर्ष 2019 रहा।
 
उस वर्ष शुरुआती मानसून कमजोर रहा और अल नीनो को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। लेकिन बाद में एक अत्यंत मजबूत पॉजिटिव IOD विकसित हुआ। परिणामस्वरूप:
  • अगस्त और सितंबर में बारिश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
  • देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी वर्षा दर्ज की गई।
  • वर्ष के अंत तक भारत में सामान्य से लगभग 10% अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।
  • संभावित सूखे का खतरा काफी हद तक टल गया।

क्या 2026 में भी पॉजिटिव IOD बनेगा भारत का 'रक्षक'?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में अल नीनो की वजह से मानसून की शुरुआत अपेक्षाकृत कमजोर रही है और कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
 
हालांकि राहत की बात यह है कि कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय मौसम मॉडल अगस्त-सितंबर के दौरान पॉजिटिव IOD के विकसित होने के संकेत दे रहे हैं।

यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो:

  • महाराष्ट्र
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • कर्नाटक
जैसे राज्यों में बारिश की स्थिति सुधर सकती है और सूखे का खतरा काफी कम हो सकता है।
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अल नीनो और पॉजिटिव IOD, दोनों ही पृथ्वी की जटिल जलवायु प्रणाली के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। जहां अल नीनो भारतीय मानसून के लिए चुनौती पैदा कर सकता है, वहीं पॉजिटिव IOD कई बार उस चुनौती को संतुलित करने का काम करता है।
 
इसलिए मौसम वैज्ञानिक अब केवल अल नीनो पर नहीं, बल्कि हिंद महासागर की गतिविधियों पर भी उतनी ही बारीकी से नजर रख रहे हैं। आने वाले महीनों में यदि पॉजिटिव IOD मजबूत होता है, तो यह भारत के लिए राहत की बड़ी खबर साबित हो सकता है।
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