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Last Modified: बुधवार, 3 सितम्बर 2025 (14:23 IST)

पुतिन का डबल गेम, पाकिस्तान से बढ़ा रहे हैं दोस्ती, क्यों बढ़ रही है भारत की चिंता?

Russian President Vladimir Putin double game
Russian President Vladimir Putin double game: वैश्विक कूटनीति के केंद्र में एक बार फिर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हैं। इस बार उनकी चर्चा का विषय है पाकिस्तान के प्रति उनका बढ़ता रुझान। हाल ही में पुतिन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को रूस यात्रा पर आमंत्रित किया है, जिससे भारत समेत कई देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुतिन भारत और पाकिस्तान के साथ 'डबल गेम' खेल रहे हैं, या यह अमेरिका को पाकिस्तान से दूर करने की रूस की नई भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है?
 
पाकिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ : हाल के वर्षों में रूस और पाकिस्तान के संबंधों में काफ़ी गर्मजोशी आई है। 2025 में रूस ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और ब्रिक्स जैसे मंचों पर पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को मज़बूत किया है।
 
रूसी समाचार एजेंसी तास (TASS) के अनुसार, पुतिन ने शहबाज़ शरीफ़ को मॉस्को में होने वाले एक द्विपक्षीय सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है। इस सम्मेलन में व्यापार, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी। यह आमंत्रण ऐसे समय में आया है, जब रूस भारत के साथ अपनी दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को भी बनाए रखने की बात करता है।
 
पाकिस्तान के लिए रूस का यह रुख नया नहीं है। 2023 में रूस ने पाकिस्तान को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया था, जिसने भारत में चिंता पैदा की थी। इसके अलावा, रूस और पाकिस्तान के बीच सैन्य अभ्यास और हथियारों की आपूर्ति को लेकर भी बातचीत चल रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का यह कदम भारत को एक संदेश देने की कोशिश हो सकता है, खासकर तब जब भारत ने पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को बढ़ाया है।
 
भारत-रूस संबंधों पर क्या होगा असर? : भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी दोस्ती जगजाहिर है। रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है और दोनों देशों ने कई रणनीतिक परियोजनाओं में सहयोग किया है। हालांकि, हाल के वर्षों में भारत का पश्चिमी देशों की ओर झुकाव और रूस का चीन व अब पाकिस्तान के साथ बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है।
 
विदेश नीति विशेषज्ञ प्रो. हर्ष पंत ने हिंदुस्तान टाइम्स के एक हालिया लेख में कहा कि पुतिन की रणनीति क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की है। रूस नहीं चाहता कि भारत पूरी तरह पश्चिमी खेमे में चला जाए, लेकिन साथ ही वह पाकिस्तान और चीन के साथ अपने संबंधों को मज़बूत करके भारत पर दबाव बनाना चाहता है।
 
शहबाज शरीफ की रूस यात्रा का क्या है एजेंडा? : शहबाज़ शरीफ की प्रस्तावित रूस यात्रा को लेकर कई अटकलें हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा में दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, खासकर गैस पाइपलाइन परियोजनाओं और रियायती तेल आपूर्ति पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा, रूस-पाकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग भी एजेंडे में शामिल हो सकते हैं।
 
पाकिस्तान के अखबार डॉन ने हाल ही में बताया कि रूस ने पाकिस्तान को आधुनिक हथियारों की आपूर्ति में भी रुचि दिखाई है, जिससे भारत की चिंताएं और बढ़ सकती हैं।
 
विश्लेषक क्या कहते हैं? : कई विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन की यह रणनीति रूस की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने का हिस्सा है। यूक्रेन युद्ध के बाद से पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा रूस, नए सहयोगी तलाश रहा है। आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान, रूस के लिए एक आकर्षक साझेदार हो सकता है। दूसरी ओर, भारत जैसे देशों के लिए यह एक जटिल कूटनीतिक चुनौती पेश करती है।
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