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ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, लगा एक और तगड़ा झटका, TMC की प्रदेश अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
Mamata Banerjee's troubles have mounted : तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आज उन्हें एक और तगड़ा झटका है। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। उन्होंने न सिर्फ अध्यक्ष के पद से बल्कि पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अपने फैसले की जानकारी दी। इस इस्तीफे से ममता बनर्जी और भी अकेली पड़ गई हैं, क्योंकि फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास जैसे पुराने करीबी सहयोगी पहले ही अलग हो चुके थे। दरअसल एक दिन पहले ही ममता बनर्जी के पार्टी ऑफिस पर बागी गुट ने कब्जा कर लिया था।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आज उन्हें एक और तगड़ा झटका है। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। उन्होंने न सिर्फ अध्यक्ष के पद से बल्कि पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी को लिखा पत्र
उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अपने फैसले की जानकारी दी। इस इस्तीफे से ममता बनर्जी और भी अकेली पड़ गई हैं, क्योंकि फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास जैसे पुराने करीबी सहयोगी पहले ही अलग हो चुके थे। दरअसल एक दिन पहले ही ममता बनर्जी के पार्टी ऑफिस पर बागी गुट ने कब्जा कर लिया था।
ममता बनर्जी को लेकर क्या बोलीं चंद्रिमा भट्टाचार्य?
विधायक दल के 2 टुकड़े होने के बाद 3 जून को ममता बनर्जी ने चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल टीएमसी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। वह ममता बनर्जी की करीबी नेताओं में शुमार थीं। अब उनके अचानक ऐसे सभी पदों से इस्तीफे को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने पत्र में ममता बनर्जी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए लिखा कि उनके मन में हमेशा उनके लिए सर्वोच्च सम्मान रहेगा और भविष्य में भी वह उनका सम्मान करती रहेंगी।
यह विवाद भी हो सकता है इस्तीफे की वजह
चंद्रिमा भट्टाचार्य पूर्व की ममता बनर्जी सरकार में राज्यमंत्री के रूप में वित्त और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुकीं भट्टाचार्य पार्टी की महिला इकाई की प्रमुख नेताओं में भी शामिल रही हैं। ममता बनर्जी और चंद्रिमा भट्टाचार्य के बीच विवाद बागी गुट के पार्टी ऑफिस पर कब्जा के बाद शुरू हुआ। जब बागी विधायक पार्टी के ऑफ़िस पर कब्जा कर रहे थे, तब चंद्रिमा भी वहां मौजूद थीं। इस घटना के बाद ममता बनर्जी ने उनसे कहा कि उन्होंने टीएमसी भवन को बागियों के हवाले कर दिया।
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि मैं कौन होती हूं टीएमसी भवन सौंपने वाली? इस इस्तीफे के पीछे की मुख्य वजह उनके पुत्र सौरव बसु का हाल ही में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बागी' गुट में शामिल होना माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद चंद्रिमा ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन जिस तरह से उनके कार्यों और निष्ठा पर सवाल उठाए गए, उसके बाद उनका बने रहना मुश्किल था।
क्या इस फैसले से आहत थीं चंद्रिमा भट्टाचार्य?
तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने 15 जून को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के सचिव अश्विनी मोहाल को एक गोपनीय पत्र लिखा था। पत्र में ममता ने लिखा था कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की ओर से चुनाव आयोग के साथ किसी भी प्रकार के आधिकारिक संवाद, पत्राचार या सांगठनिक फैसलों के लिए केवल 2 नेता राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और संयुक्त सचिव डेरेक ओब्रायन अधिकृत हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ममता बनर्जी के 15 जून के फैसले से चंद्रिमा भट्टाचार्य आहत थीं।
